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जन्माष्टमी से समस्त ताप व पाप का होता है नाश

Updated at : 17 Aug 2025 9:12 PM (IST)
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जन्माष्टमी से समस्त ताप व पाप का होता है नाश

जिले में शनिवार को भारी हर्षोल्लास के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया. इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के भक्तों व श्रद्धालुओं के द्वारा ठाकुरवाडियों में पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा- अर्चना की गई.

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बिहारशरीफ. जिले में शनिवार को भारी हर्षोल्लास के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया. इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के भक्तों व श्रद्धालुओं के द्वारा ठाकुरवाडियों में पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा- अर्चना की गई. घरों में भी श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर रखकर विधिवत पूजा और उपासना की गई. इस अवसर पर जिले के सभी ठाकुरवाडियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में कंस के कारागार में हुआ था. इसलिए भक्तों व श्रद्धालुओं के द्वारा मध्य रात्रि तक ठाकुरबाड़ियो में भजन कीर्तन गाया गया. श्रद्धालुओं के द्वारा मध्य रात्रि के बाद भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया. इस अवसर पर श्रद्धालुओं के द्वारा बधाई गीत भी गए गए. भगवान श्री कृष्ण को स्नान ध्यान कराने के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाये गए तथा उन्हें झूले पर भी झुलाया गया. ””””””””हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की”””””””” तथा अन्य धार्मिक नारों से ठाकुरबाड़ी गुंजायमान होते रहे. श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर रही. लगभग 2 घंटे के पूजा अर्चना और आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया. स्थानीय गढ़ पर स्थित छोटी मंदिर ठाकुरबाड़ी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना तथा दर्शन करने के लिए पहुंचे . यहां संध्या भजन का भी आयोजन किया गया. इसमें कलाकारों के द्वारा एक से बढ़कर एक भगवत भजन प्रस्तुत किया गया. इस संबंध में मंदिर के पुजारी अशोक कुमार गिरि ने बताया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी सनातन धर्मावलंबियों का सर्व प्रमुख पर्व है. जिले में श्रद्धालुओं के द्वारा पूरी आस्था के साथ यह पर्व मनाया जाता है. इस वर्ष भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व यहां पूरी धार्मिक आस्था तथा काफी उत्साह के साथ मनाया गया. इधर यादव छात्रावास निचली किला गढपर भी विद्यार्थियों के द्वारा भारी उत्साह के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया. इस अवसर पर छात्रों के द्वारा छात्रावास में भगवान श्री कृष्णा की प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई. शाम में विशिष्ट कलाकारों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव से संबंधित भजन, कीर्तन और कव्वाली आदि का प्रस्तुतीकरण किया गया. इसमें हजारों की संख्या में दर्शकों ने भाग लिया. जिले के अन्य ठाकुरवाडियों में भी शनिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की धूम रही. हर जगह भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने मन्नतें मांगी. इस संबंध में पं श्रीकांत शर्मा आचार्य ने कहा कि भारत भूमि मनुष्यों की कर्मभूमि, तपोभूमि, साधनाभूमि, अवतार भूमि तथा लीला भूमि के रूप में जाना जाता है. भगवान कृष्ण का अवतरण द्वापर युग में भाद्र कृष्ण पक्ष को अष्टमी तिथि की मध्य रात्रि को हुआ था. भगवान श्री कृष्ण 16 कलाओं से युक्त पूर्ण परब्रह्म परमात्मा माने जाते हैं. उनका पृथ्वी पर अवतरण प्रेम-ज्ञान तथा कर्मयोग का संदेश देने के साथ साथ भक्तों, सज्जनों, साधु- संतो तथा ब्राह्मणों की रक्षा एवं दुष्टों के विनाश के लिए हुआ था. इसलिए सनातन धर्मावलंबियों में भगवान श्री कृष्ण की पूजा- आराधना का विशेष महत्व है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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