नालंदा की बावन बूटी को मिला GI टैग, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री ने सौंपा प्रमाण पत्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बुनकर सहयोग समिति के गौतम कुमार प्रमाण पत्र लेते | Prabhat Khabar Network
Nalanda Bawan Buti GI Tag : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नालंदा की पारंपरिक बावन बूटी कला को जीआई टैग से सम्मानित किया गया है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि बिहार के बुनकरों के लिए नए बाज़ार और बेहतर आय के अवसर खोलेगी. इस टैग से कला को कानूनी संरक्षण मिलेगा और सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन होगा.
Nalanda Bawan Buti GI Tag : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नालंदा की सदियों पुरानी और विशिष्ट बुनकरी कला 'बावन बूटी' को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. बावन बूटी हस्तशिल्प को आधिकारिक रूप से भौगोलिक उपदर्शन (जीआई) टैग का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया.
इस ऐतिहासिक उपलब्धि से नालंदा के बुनकर समुदाय में खुशी और उत्साह का माहौल है. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी की गरिमामयी उपस्थिति में नालंदा के बावन बूटी हस्तशिल्प प्रतिनिधि बसवान बिगहा प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति को जीआई टैग का प्रमाण पत्र सौंपा.
यह उपलब्धि बिहार के बुनकर समुदाय और हथकरघा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
जीआई टैग मिलने से कला को मिलेगा कानूनी संरक्षण
बावन बूटी नालंदा की पारंपरिक बुनकरी कला है, जिसकी अपनी अलग पहचान और विशिष्ट डिजाइन शैली है. जीआई टैग मिलने के बाद इस कला की प्रामाणिकता और विशिष्ट पहचान को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा.
इससे बावन बूटी के नाम पर किसी अन्य क्षेत्र में तैयार किए जाने वाले उत्पादों पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी तथा वास्तविक कारीगरों और बुनकरों के हितों की रक्षा होगी.
बुनकरों के लिए नए बाजार और बेहतर आय के अवसर
इस उपलब्धि से नालंदा के स्थानीय बुनकरों और कारीगरों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है. उन्हें अपनी कला का उचित मूल्य मिलने के साथ ही बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और देश-विदेश के बाजारों तक सीधे पहुंच बनाने के नए अवसर मिल सकते हैं. इससे पारंपरिक बुनकरी से जुड़े परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलने की संभावना है.
नाबार्ड के प्रयास और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
इस अवसर पर बावन बूटी को जीआई टैग दिलाने में नाबार्ड के बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के प्रयासों की विशेष सराहना की गई. निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग से इस पारंपरिक कला को जीआई टैग दिलाने का सपना साकार हुआ.
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मिली यह उपलब्धि नालंदा की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. बुनकर समुदाय ने इसे अपनी पीढ़ियों पुरानी कला को नई पहचान दिलाने वाला मील का पत्थर बताया.
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लेखक के बारे में
By सुनील कुमार
सुनील कुमार वर्ष 2015 से प्रभात खबर, बिहारशरीफ-नालंदा में फोटोग्राफर सह जिला संवाददाता के रूप में पत्रकारिता कर रहे हैं. खबरों की सटीकता, बेहतरीन फोटोग्राफी और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उनकी पहचान बन चुकी है. पत्रकारिता जीवन में इन्होंने कई दैनिक अखबारों के अलावा डिजिटल मीडिया के लिए भी संवाददाता का कार्य किया है.
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