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हत्या मामले में सश्रम आजीवन कारावास की सजा

Updated at : 15 Sep 2025 9:13 PM (IST)
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हत्या मामले में सश्रम आजीवन कारावास की सजा

सोमवार को हिलसा व्यवहार न्यायालय के तृतीये अपर जिला सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार यादव ने एक व्यक्ति की 1991 यानी 34 वर्ष पुराने हत्या मामले में 85 वर्षीय अभियुक्त किशोर गोप को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है,जवकि छह अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में पहले ही आरोपमुक्त किए गए हैं.

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हिलसा (नालंदा). सोमवार को हिलसा व्यवहार न्यायालय के तृतीये अपर जिला सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार यादव ने एक व्यक्ति की 1991 यानी 34 वर्ष पुराने हत्या मामले में 85 वर्षीय अभियुक्त किशोर गोप को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है,जवकि छह अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में पहले ही आरोपमुक्त किए गए हैं. सोमवार को अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी पंकज कुमार दास ने इस मामले की पुष्टि करते हुए जानकारी दिया की वर्ष 1991 ईस्वी में 5 जनवरी को हिलसा अनुमंडल क्षेत्र के चंडी थाना अन्तरगत कैसोर गांव जमीन को लेकर पूर्व से चली आ रही थी. जमीन विवाद में दो पक्षों में मारपीट हुई थी. जमीन विवाद में गांव के ही रामावतार यादव की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग राजदेव यादव एवं सुनीता देवी भी गोली लगने से घायल हो गई थी. मृतक रामावतार यादव के चाचा मुकुंद गोप ने दोषी करार दिए गए. किशोर गोप के अलावे नरेश गोप, सुंदर गोप, श्याम गोप, चंद्रशेखर गोप, सुरेश गोप, अवधेश गोप, जागेश्वर गोप, विद्यासागर गोप, लड्डू गोप, मोहित गोप एवं अर्जुन गोप के विरुद्ध चंडी थाना में कांड संख्या 5/ 1991 दर्ज कराया गया था. आरोप लगाया गया था कि अभियुक्तों ने घर पर हमला कर गोलीबारी की. गोली लगने से भतीजे रामवतार यादव की मृत्यु हो गई थी. छात्रावास संख्या 19/ 1992 के तहत अभियोजन की कार्रवाई चली. इस अवधि में अभियुक्त जागेश्वर गोप, विद्यासागर गोप, लड्डू गोप, मोहित गोप एवं अर्जुन गोप की मृत्यु हो गई. बचे सात अभियुक्त किशोर गोप के अलावे नरेश गोप, सुंदर गोप, श्याम गोप, चंद्रशेखर गोप, सुरेश गोप, अवधेश गोप के विरुद्ध न्यायालय में सुनवाई हुई. इस सुनवाई में तृतीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार यादव ने अभियुक्त किशोर गोप को भादवि की धारा 302 एवं शस्त्र अधिनियम की धारा 27 में दोषी करार और छह अन्य अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया. दोषी करार दिए गए अभियुक्त किशोर गोप को भादवि की धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास के साथ दस हजार रुपए अर्थ दंड एवं शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत 5 वर्ष की कारावास एवं पांच हजार रुपए अर्थ दंड की सजा का सजा सुनाया गया है. दोनों सजाएं एक साथ चलेंगे. मुदई की ओर से अधिवक्ता श्याम सुंदर प्रसाद शर्मा एवं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद ने बहस किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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