नालंदा: राजगीर के जलस्रोत बचाने की पहल, डीएम ने गठित की उच्चस्तरीय जांच समिति

Author Ramvilas prasad|Edited by Rajeev Kumar
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राजगीर के जलस्रोत बचाने की पहल, डीएम ने गठित की उच्चस्तरीय जांच समिति

राजगीर के ब्रह्मकुंड में मिले प्राचीन अवशेषों और सूखते जलस्रोतों की जांच के लिए डीएम ने उच्चस्तरीय समिति गठित की है. अवैध बोरिंग पर भी रोक लगाई गई है.

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Nalanda News : राजगीर के ऐतिहासिक ब्रह्मकुंड परिसर में विकास कार्य के दौरान मिले संभावित प्राचीन अवशेषों और प्राकृतिक जलस्रोतों के लगातार सूखने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. जिलाधिकारी उदिता सिंह ने गुरुवार को स्थल निरीक्षण के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से पुरावशेषों की वैज्ञानिक जांच कराने और ब्रह्मकुंड के आसपास हो रही अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए. जलस्रोतों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी घोषणा की गई.

खुदाई में मिले पुरावशेषों की होगी वैज्ञानिक जांच

समीक्षा बैठक के बाद जिलाधिकारी ने ब्रह्मकुंड परिसर का निरीक्षण कर निर्माणाधीन जनेऊ भवन के फाउंडेशन कार्य का जायजा लिया. अधिकारियों ने बताया कि खुदाई के दौरान कुछ ऐसे अवशेष मिले हैं, जिनका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व हो सकता है. इस पर डीएम ने एएसआई को पत्र भेजकर पुरावशेषों की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व की जांच कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि यदि स्थल का पुरातात्विक महत्व प्रमाणित होता है तो नियमानुसार इसे एएसआई के संरक्षण में सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

सूखते जलस्रोतों पर बनी विशेषज्ञ समिति

निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ब्रह्मकुंड सहित राजगीर के प्राकृतिक जलस्रोतों के लगातार सूखने का मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि पहले सालभर बहने वाले कई प्राकृतिक झरने अब सूख चुके हैं. इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जलस्रोतों के सूखने के कारणों की वैज्ञानिक जांच के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ शोध समिति गठित करने की घोषणा की. साथ ही प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अलग एक्शन कमेटी भी बनाई जाएगी.

अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक के निर्देश

जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि ब्रह्मकुंड और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों के आसपास हो रही सभी अवैध बोरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि भूजल के अंधाधुंध दोहन से जलस्तर प्रभावित हो रहा है, इसलिए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

धरोहर और जलस्रोतों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता

डीएम उदिता सिंह ने कहा कि राजगीर की ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित विभागों के समन्वय से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.


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