नालंदा में सफाई कर्मियों की हड़ताल छठे दिन जारी, 1500 टन कचरा जमा, शहर में बढ़ी परेशानी

Updated:
विज्ञापन

शहर में आक्रोश मार्च निकालते सफाई कर्मी | Prabhat Khabar Network

नालंदा शहर में नगर निगम के सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. छह दिनों की हड़ताल के कारण 1500 टन से अधिक कचरा सड़कों पर जमा हो गया है, जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. सफाईकर्मी अपनी मांगों पर अड़े हैं.

विज्ञापन

Nalanda Sanitation Workers Strike : बिहारशरीफ शहर में नगर निगम के सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को छठे दिन भी जारी रही. गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. सड़कों, गलियों और कूड़ा प्वाइंटों पर कचरे के ढेर लग गए हैं और सड़ांध से आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार और विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा. हड़ताल का असर शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिख रहा है. अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी है.

1500 टन कचरा बिखरा और वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव

नगर निगम से प्रतिदिन करीब 250 टन कचरा उठता था. लेकिन पिछले छह दिनों से एक भी गाड़ी नहीं निकली. अनुमान है कि अब तक 1500 टन से अधिक कचरा शहर में पड़ा है. डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह और नालियों की सफाई भी पूरी तरह बाधित है.

हर वार्ड में बने कूड़ा प्वाइंट अब कचरे के पहाड़ में तब्दील हो गए हैं. छह दिनों से कचरा सड़ने से भयंकर बदबू फैल रही है. बरसात के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. लोगों का कहना है कि नाक पर रूमाल रखकर घर से निकलना पड़ रहा है.

डेंगू, मलेरिया और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब तक नगर निगम प्रशासन ने कचरा उठाव के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जिससे शहरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

सफाईकर्मियों का आक्रोश मार्च और धरना प्रदर्शन

हड़ताल के बीच मंगलवार को 1300 सफाईकर्मियों ने अपनी तीन सूत्री मांगों के समर्थन में शहर में आक्रोश मार्च निकाला. मार्च नगर निगम मुख्य द्वार से शुरू होकर हॉस्पिटल मोड़, भरावपर, आलमगंज और पुल होते हुए वापस निगम कार्यालय पहुंचा.

मार्च में सैकड़ों की संख्या में कर्मी और उनके परिवार शामिल हुए. बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मी पिछले छह दिनों से नगर निगम के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे हैं.

यूनियन नेताओं के तीखे तेवर और चेतावनी

यूनियन के उपाध्यक्ष करण कुमार ने कहा कि हम भूखे-प्यासे यहां बैठे रहेंगे. एक तरफ प्रधानमंत्री हमें भगवान कहते हैं, दूसरी तरफ 300-400 रुपये कमाने वाले मजदूरों को सरकार ने सड़क पर बैठा दिया है. सरकार को जनता के स्वास्थ्य की भी परवाह नहीं है.

संगठन के प्रतिनिधि मनोज रविदास ने कहा कि यह आंदोलन अनिश्चितकालीन है. संगठन के विक्की कुमार ने चेतावनी दी कि चाहे एक महीना लगे, पीछे नहीं हटेंगे. अभी हम शांतिपूर्ण हैं. अगर निगम या पुलिस ने प्रताड़ित करने की कोशिश की तो आंदोलन उग्र रूप लेगा.

सफाई कर्मियों की प्रमुख तीन सूत्री मांगें

  1. सफाईकर्मियों का स्थायीकरण किया जाए.
  2. समान काम का समान वेतन दिया जाए.
  3. ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए.

Also Read : मोकामा रेल पुल पर एनआई कार्य के कारण सितंबर में बदलेगा ट्रेनों का रूट, गया जी के रास्ते चलेंगी कई ट्रेनें


विज्ञापन
रंजीत सिंह

लेखक के बारे में

By रंजीत सिंह

रणजीत सिंह ने वर्ष 2006 में प्रिंट मीडिया से पत्रकारिता की शुरूआत की. वर्तमान में प्रभात खबर के बिहारशरीफ कार्यालय से जुड़कर कार्य कर रहे हैं. 19 वर्ष के पत्रकारिता जीवन में कई लिडिंग दैनिक अखबारों के अलावा डिजिटल मीडिया के लिए भी संवाददाता के तौर पर कार्य किया है. स्वास्थ्य, नगर निकाय, कृषि, बिजली, नियोजनालय, पशुपालन एवं गव्य विकास विषयों पर नियमित खबर लिख रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन