नालंदा में बढ़ रहीं नाबालिगों से यौन हिंसा की घटनाएं, परिचितों पर ही लग रहे यौन शोषण के आरोप, बढ़ी अभिभावकों की चिंता
व्यवहार न्यायालय नालंदा की तस्वीर
Bihar Sharif News : नालंदा में नाबालिगों के साथ यौन अपराध चिंता का विषय, वास्तविक आंकड़े हो सकते हैं अधिक. पढ़िए पूरी डीटेल रिपोर्ट.
बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिले में नाबालिगों के साथ यौन हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. विभिन्न थाना क्षेत्रों में औसतन प्रतिदिन एक से दो नाबालिग बालिकाएं यौन शोषण का शिकार हो रही हैं. अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता के परिचित, पड़ोसी या दोस्त ही होते हैं. सामाजिक बदनामी और पारिवारिक दबाव के कारण कई घटनाएं पुलिस तक भी नहीं पहुंच पाती हैं. इससे वास्तविक आंकड़ा दर्ज मामलों से कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है.
हर माह पॉक्सो कोर्ट में पहुंच रहे 45 से 60 नए मामले
जिला व्यवहार न्यायालय में प्रत्येक माह औसतन 45 से 60 पॉक्सो एक्ट के मामले सुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं. दोनों विशेष पॉक्सो अदालतों में नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जा रही है. लगातार नए मामले आने से अदालतों पर भी कार्यभार बढ़ता जा रहा है. इसके बावजूद मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है. न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच लंबित मामलों की संख्या भी चिंता का विषय बनी हुई है.
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दो विशेष पॉक्सो कोर्ट बनने से सुनवाई में आई तेजी
वर्ष 2021 में नालंदा जिला व्यवहार न्यायालय में दो विशेष पॉक्सो अदालतों की स्थापना की गई थी. इससे पहले पूरे जिले के लिए केवल एक ही पॉक्सो कोर्ट था, जहां बड़ी संख्या में मामले लंबित थे. नई अदालतों के गठन के बाद मामलों की सुनवाई और निष्पादन की गति तेज हुई है. अब हर वर्ष बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया जा रहा है. फिर भी नए मामलों की लगातार बढ़ती संख्या चुनौती बनी हुई है.
सामाजिक दबाव के कारण कई आरोपी सजा से बच रहे
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कई मामलों में पीड़िता और उसके परिवार पर सामाजिक दबाव बनाया जाता है. बदनामी के डर से कई परिवार मुकदमे को आगे बढ़ाने से पीछे हट जाते हैं. गवाहों के मुकरने और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने से आरोप साबित करना कठिन हो जाता है. इसका सीधा लाभ आरोपियों को मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि गवाह संरक्षण और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.
अधिकांश मामलों में 19 से 25 वर्ष के युवक आरोपी
कोर्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार पॉक्सो मामलों में अधिकांश आरोपी 19 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवक हैं. इनमें पड़ोसी, दोस्त और परिचित लोगों की संख्या अधिक पाई जाती है. कई मामलों में विश्वास जीतकर या प्रेम-प्रसंग का झांसा देकर अपराध को अंजाम दिया जाता है. हाल के महीनों में स्कूली छात्र-छात्राओं से जुड़े मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है. पुलिस ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है.

ऑर्केस्ट्रा के नाम पर नाबालिगों के शोषण के मामले भी बढ़े
सूत्रों के अनुसार दूसरे राज्यों और दूर-दराज के इलाकों से नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा में डांस कराने के नाम पर लाकर उनका शारीरिक शोषण किए जाने के मामले भी सामने आए हैं. पुलिस की कार्रवाई के बाद कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है. हालांकि पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के अभाव में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है. इस तरह के मामलों पर प्रभावी निगरानी की आवश्यकता बताई जा रही है. सामाजिक संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है.
जागरूकता बढ़ी, लेकिन अब भी कई मामले दब जाते हैं
विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार का कहना है कि पहले की तुलना में लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़ी है. अब अधिक परिवार पॉक्सो एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहे हैं. इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामले सामाजिक बदनामी और पारिवारिक दबाव के कारण सामने नहीं आ पाते. उनका मानना है कि पुलिस, प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से ही बाल यौन हिंसा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है. जागरूकता अभियान और पीड़ितों को सुरक्षा उपलब्ध कराना समय की जरूरत है.
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