शीशम के पेड़ों पर रहस्यमय बीमारी का हमला! 20 साल की मेहनत पर संकट, किसानों के लिए नई मुसीबत

सूखे शीशम के पेड़ की तस्वीर
Bihar Sharif News : बभनियावां से सौर तक शीशम के पेड़ों में फैल रही रहस्यमय बीमारी, पढ़िए डीटेल रिपोर्ट.
बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिले में रहस्यमय बीमारी के कारण वर्षों पुराने शीशम के पेड़ तेजी से सूख रहे हैं. मोटी आमदनी की उम्मीद में किसानों ने दो दशक पहले खेतों, तालाबों, पइन और पोखरों के किनारे बड़ी संख्या में शीशम के पौधे लगाए थे. अब जब पेड़ कटाई योग्य और तैयार हो रहे हैं, तभी अचानक उनके सूखने की घटनाएं बढ़ गई हैं. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. बिहारशरीफ के आसपास के इलाकों के साथ-साथ बेन प्रखंड की एकसारा पंचायत के बभनियावां, मरसुआ, इनायतपुर, सौर समेत दर्जनों गांवों में शीशम के पेड़ों में यह समस्या देखी जा रही है. किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पेड़ों के सूखने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन अब इसकी रफ्तार काफी तेज हो गई है. बड़ी संख्या में तैयार पेड़ अचानक सूख रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
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किसानों की बढ़ी चिंता, नहीं मिल रहा समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि शीशम के पेड़ों में फैल रही बीमारी की न तो वन विभाग गंभीरता से जांच कर रहा है और न ही कृषि विभाग की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है. किसानों का कहना है कि बीमारी का कारण और बचाव का उपाय स्पष्ट नहीं होने से वे असहाय महसूस कर रहे हैं. कई किसान मजबूरी में सूखते पेड़ों को औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं. बभनियावां गांव के किसान नागेंद्र प्रसाद बताते हैं कि ढाई फीट या उससे अधिक मोटाई वाले शीशम के पेड़ अचानक सूखने लगते हैं. इतने बड़े और ऊंचे पेड़ों पर दवा का छिड़काव करना भी आसान नहीं है. स्थानीय स्तर पर किसानों को बीमारी से बचाव संबंधी प्रभावी सलाह भी नहीं मिल रही है.

विशेषज्ञों ने बताई बीमारी की संभावित वजह
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार शीशम के पेड़ों के सूखने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जड़ों में कीटों का प्रकोप, मिट्टी का अत्यधिक सख्त होना, जलभराव, भू-जल स्तर में गिरावट और बदलता मौसम इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. इसके अलावा फ्यूजेरियम नामक फफूंद से होने वाली ‘विल्ट’ या ‘उखड़ा’ बीमारी भी शीशम के लिए बेहद घातक साबित हो रही है. कृषि विज्ञान केंद्र हरनोत के वैज्ञानिक कुमारी विभा रानी के अनुसार यह मृदा जनित रोग है, जो फ्यूजेरियम कवक के कारण फैलता है. इसकी पहचान पेड़ की पत्तियों के एक साथ पीला पड़ने, मुरझाने और धीरे-धीरे पूरे पेड़ के सूखने से होती है. यह रोग खासकर उन क्षेत्रों में अधिक फैलता है, जहां लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है.
जैविक उपचार से बचाव संभव
विशेषज्ञों ने किसानों को ट्राइकोडर्मा आधारित जैविक फफूंदनाशी के उपयोग की सलाह दी है. इसके लिए एक किलो ट्राइकोडर्मा को 10 से 15 किलो वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर सात से दस दिनों तक छायादार स्थान पर रखना चाहिए. इसके बाद तैयार मिश्रण को पेड़ के चारों ओर दो से ढाई किलो की मात्रा में डालने से रोग नियंत्रण में मदद मिल सकती है.
विभाग से कार्रवाई की मांग
किसानों ने शीशम के पेड़ों में फैल रही बीमारी की वैज्ञानिक जांच कराने और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सर्वेक्षण चलाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में गांवों के खेत-खलिहानों से शीशम के पेड़ लगभग समाप्त हो सकते हैं. इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि पर्यावरण और हरित आवरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
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By युवराज रतन
पटना जन्मस्थली है मेरी, निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित आधारित पत्रकारिता में विश्वास करता हूं. वर्तमान में मेरा उद्देश्य बिहार के स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और पाठकों तक सत्यापित जानकारी पहुंचाना है. किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले उपलब्ध तथ्यों और स्रोतों का सत्यापन करना मेरी प्राथमिकता है. पाठकों को विश्वसनीय, निष्पक्ष और जनहितकारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हूं.
प्राथमिक शिक्षा संत जेवियर्स हाई स्कूल, पटना से पूरी करने के बाद संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नॉलजी से बैचलर्स ऑफ मास कम्यूनिकेशन से स्नातक किया हूं. 2020 से पटना स्थित मीडिया संस्थान न्यूज 4 नेशन में एंकर सह प्रोड्यूसर के पद पर डेढ़ वर्षों तक काम किया. इसके उपरांत जून 2022 से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर रहते हुए डिजिटल कम्यूनिकेशन टीम में कार्य करने का मौका मिला. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के पद पर हूं इसके माध्यम से नागरिकों के पास तथ्यात्मक और सही सूचनाएँ, खबर और अपडेट देने का कार्य कर रहा हूं.
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