जिले की आबादी 29 लाख, ब्लड है महज 24 यूनिट

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 Apr 2020 2:50 AM

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बिहारशरीफ : वर्तमान में यूं तो वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से पूरी दुनिया त्रस्त है. कोरोना वायरस से बचाव को लेकर कई जरूरी कार्य भी बाधित हो रहे हैं, जो आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं. ऐसा ही एक आवश्यक कार्य ब्लड डोनेशन भी है. पिछले एक माह से जिले में एक भी […]

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बिहारशरीफ : वर्तमान में यूं तो वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से पूरी दुनिया त्रस्त है. कोरोना वायरस से बचाव को लेकर कई जरूरी कार्य भी बाधित हो रहे हैं, जो आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं. ऐसा ही एक आवश्यक कार्य ब्लड डोनेशन भी है. पिछले एक माह से जिले में एक भी रक्तदान शिविर नहीं लगने से सदर अस्पताल स्थित जिले के इकलौते ब्लड बैंक भी अब रक्त का अभाव होने लगा है. यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में गंभीर व जरूरतमंद मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है. हालांकि लॉकडाउन लागू होने के बाद से सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी कमी आयी है, जिसके कारण ब्लड की मांग भी कम है.महज एक ब्लड बैंक पर निर्भर हैं जिलावासीजिले की आबादी 29 लाख है. एक तो इतनी बड़ी आबादी के लिए जिले में महज एक ही ब्लड बैंक है, उसमें भी जब से कोरोना का कहर पूरी दुनिया में फैला है, तब से ब्लड बैंक में रक्त समूहों की भारी कमी हो रही है. अब इतनी बड़ी आबादी के लिए महज 24 यूनिट रक्त से कैसे जिंदगी बचायी जा सकती है.

ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना या आपात स्थिति में जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध होना मुश्किल हो सकता है. इसलिए समय रहते स्वास्थ्य विभाग को रक्तदान शिविर के लिए वैकल्पिक रणनीति बनाने की जरूरत है. क्योंकि, किसी भी जिले में रक्त समूहों की उपलब्धता से आपात स्थिति की विभीषिका में काफी मदद मिलती है.लगातार घट रही बैंक में ब्लड की मात्रालॉकडाउन लागू होने के दौरान ब्लड बैंक में करीब 80 यूनिट ब्लड संग्रह था, लेकिन शिविर का आयोजन नहीं होने और स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए आगे आने वाले लोगों की संख्या में कमी आने से लगातार उक्त बैंक में ब्लड की कमी होती जा रही है. गुरुवार को सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में करीब 24 यूनिट ब्लड था. हालांकि आम दिनों की अपेक्षा ब्लड की मांग में भी कमी आयी है. आम दिनों में करीब प्रतिमाह 200 से 250 यूनिट ब्लड की मांग थी. वहीं, वर्तमान में घट कर 150 से 86 यूनिटें रह गयी हैं. चालू अप्रैल माह में 150 यूनिट की मांग की गयी है, जिनमें 86 यूनिट जरूरतमंदों को ब्लड उपलब्ध कराया गया है. ओ-पॉजिटिव और बी-पॉजिटिव की मांग अधिकब्लड बैंक से सबसे अधिक ओ-पॉजिटिव और बी-पॉजिटिव रक्त की मांग है. हालांकि उक्त रक्त ग्रुप समूह के लोगों की संख्या भी अधिक है. इसी कारण ओ-पॉजिटिव व बी-पॉजिटिव रक्त अधिक जमा होता है. गुरुवार को ओ-पॉजिटिव के 19 व बी-निगेटिव के एक यूनिट रक्त ब्लड बैंक में उपलब्ध था.

शेष ए-निगेटिव, एबी-पॉजिटिव, एबी-निगेटिव, ए-बी निगेटिव, ए-पॉजिटिव समेत अन्य रक्त समूह के कुल 24 यूनिट रक्त ब्लड बैंक में उपलब्ध था. वर्तमान में ब्लड बैंक से ब्लड की मांग और ब्लड आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए मरीज के परिजनों से ब्लड के आदान-प्रदान की प्रक्रिया अपनायी जा रही है. यदि किसी मरीज को जिस रक्त समूह की मांग की जाती है, उसके बदले अन्य रक्त समूह उसके परिजन से डोनेट करने को कहा जाता है.रेडक्रॉस की पहल से आयोजित होता है रक्तदान शिविरब्लड बैंक का संचालन रेडक्रॉस सोसाइटी की देखरेख में होता है. ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध कराने के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी जिले के विभिन्न संस्था, संगठन, स्कूल-कॉलेज आदि से स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संपर्क कर समय-समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन कराता है. जिले में सबसे अधिक संत निरंकारी मंडल की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में रक्त संग्रह होता है.

साल में एक बार संत निरंकारी मंडल रक्तदान करता है, जिससे जिले के ब्लड बैंक को करीब 80 से 90 यूनिट रक्त मिलता है. इसके बाद एचडीएफसी बैंक द्वारा साल में तीन से चार रक्तदान शिविर आयोजित कर ब्लड बैंक को रक्त उपलब्ध कराया जाता है. रक्तदान के लिए नयी रणनीति की जरूरतकोरोना वायरस को हराने के लिए पूर्व में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन कोरोना के बढ़े संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन की अवधि तीन मई तक बढ़ा दिया गया. ऐसे में रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं होता है, तो ब्लड बैंक की स्थिति बदतर हो सकती है. स्वास्थ्य विभाग चाहे तो अलग-अलग संस्थाओं को जागरूक करके एंबुलेंस की व्यवस्था देकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन करवा सकता है. रक्तदान के लिए युवा वर्ग की भी मदद ली जा सकती है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को रक्तदान शिविर की नयी रणनीति बनाने की जरूरत है. हालांकि लॉकडाउन के पूर्व आम दिनों में औसतन प्रतिमाह तीन से पांच अलग-अलग संस्थाएं, कॉलेज, संगठन के माध्यम से रक्तदान शिविर का आयोजन होता था और 10 से 15 लोग स्वेच्छा से ब्लड डोनेट करते थे. वर्तमान में लॉकडाउन होने से यह सभी प्रक्रिया ठप है.क्या कहते हैं अधिकारी ब्लड बैंक का काम 24 घंटे चालू है. सामूहिक शिविर लगाने का काम कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्थगित कर दिया गया है, परंतु स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले के लिए ब्लड बैंक हमेशा खुला है. वर्तमान में रक्त संग्रह में कमी आयी है, परंतु ब्लड की मांग में भी कमी आयी है, उस हिसाब से रक्त पर्याप्त है.

डॉ अशोक कुमार, ब्लड बैंक इंचार्ज, नालंद

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Pritish Sahay

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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