नालंदा की महिलाओं ने बदली अपनी तकदीर, 35 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़े 3.68 लाख परिवार, जानें कैसे बनीं आत्मनिर्भर

Author Kanchan kumar|Edited by Sakshi Kumari
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महिला समूहों के दम पर बदली नालंदा की तस्वीर

महिला समूहों के दम पर बदली नालंदा की तस्वीर

Nalanda Jeevika Scheme : नालंदा जिले में जीविका योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूह आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रहे हैं. बैंक से ऋण लेकर महिलाएं खेती, डेयरी, सिलाई जैसे व्यवसाय कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.

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Nalanda Jeevika Scheme : बिहार के नालंदा जिले से महिला सशक्तिकरण की एक शानदार तस्वीर सामने आई है. यहां जीविका योजना से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूह अब गांवों की पूरी तस्वीर बदल रहे हैं. कभी सिर्फ घर की जिम्मेदारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपना खुद का कारोबार चला रही हैं. ये महिलाएं बैंक से ऋण लेकर अपना रोजगार खड़ा कर रही हैं और परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं.

जीविका से मिला महिलाओं को नया आत्मविश्वास

नालंदा में जीविका ने महिलाओं के आत्मविश्वास को एक नई पहचान दी है. घर की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है. इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अगर उन्हें सही अवसर, उचित प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा कर सकती हैं.

35 हजार समूहों से जुड़े 3.68 लाख परिवार

जिले में महिलाओं के ये स्वयं सहायता समूह काफी तेजी से विस्तार कर रहे हैं. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, नालंदा जिले में 35 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है. इन समूहों से 3 लाख 68 हजार से ज्यादा परिवार जुड़ चुके हैं और आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

445.59 करोड़ रुपये का मिला बैंक ऋण

जीविका समूहों के कारोबार को बैंक ऋण से काफी रफ्तार मिली है. जानकारी के अनुसार, जीविका समूहों को अपना रोजगार बढ़ाने के लिए अब तक 445.59 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण प्राप्त हो चुका है. इस भारी-भरकम आर्थिक मदद से महिलाओं के व्यापार में काफी तेजी आई है.

इन व्यवसायों में महिलाओं ने आजमाया हाथ

बैंक से मिली ऋण राशि का उपयोग कर हजारों महिलाएं विभिन्न प्रकार के व्यवसाय से जुड़ गई हैं. महिलाएं मुख्य रूप से खेती, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, सिलाई और खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम कर रही हैं. इसके अलावा कई छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर वे अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है.

2006 में शुरू हुई थी जीविका योजना

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर वर्ष 2006 में जीविका योजना की शुरुआत हुई थी. उस समय देखा गया सपना आज नालंदा में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल बन चुका है. आज गांव-गांव में महिलाएं बचत करने से लेकर कारोबार चलाने तक की पूरी जिम्मेदारी खुद संभाल रही हैं.

समाज में बढ़ा सम्मान

जीविका ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समाज में उनकी पहचान और सम्मान को भी काफी बढ़ाया है. सफलता की यह दर बताती है कि आने वाले समय में और भी अधिक परिवार इस योजना से जुड़ेंगे. इन स्वयं सहायता समूहों के निरंतर विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था भविष्य में और भी अधिक मजबूत होगी.

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