बिहार के स्कूलों में अब 10 मिनट का 'आनापान' ध्यान, JDU MLC ने शिक्षा विभाग से की मांग

सांकेतिक तस्वीर
Bihar School Anapana Meditation : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को तनाव, मानसिक दबाव और नशे की लत से बचाने के लिए 10 मिनट की 'आनापान' ध्यान प्रक्रिया शुरू करने की पहल की जा रही है. विधानसभा में प्रस्ताव के बाद शिक्षा विभाग इसके लाभों का अध्ययन करेगा.
Bihar School Anapana Meditation : बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तनाव, मानसिक दबाव और नशे की लत से बचाने के लिए एक अहम पहल की जा रही है. अब कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन 10 मिनट की 'आनापान' ध्यान प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया के लाभों का अध्ययन करेगा, जिसके बाद इसे स्कूलों में लागू किया जा सकता है.
विधानसभा में उठा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा
बीते दिनों बिहार विधानसभा में इस संबंध में एक गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत किया गया. सरकार ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाया है. सरकार का कहना है कि यदि अध्ययन में यह प्रक्रिया विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए फायदेमंद पाई जाती है, तो इसे राज्य के सभी विद्यालयों में लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.
जदयू एमएलसी ने रखा प्रस्ताव, नशे से बचाने की अपील
जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने विधानसभा में यह गैर-सरकारी संकल्प पेश किया. उन्होंने कहा कि आज के समय में स्कूली बच्चों पर पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. किशोरों में स्मैक जैसे मादक पदार्थों की ओर आकर्षण भी एक बड़ी चुनौती है. बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर मेडिटेशन जैसी वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनानी जरूरी है.
आनापान ध्यान में नहीं होता कोई धार्मिक अनुष्ठान
एमएलसी नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि आनापान ध्यान में किसी प्रकार का मंत्रोच्चार या धार्मिक अनुष्ठान नहीं होता है. इसमें केवल अपनी सांस के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करना होता है. यह एक सरल और वैज्ञानिक ध्यान पद्धति है. उनका दावा है कि इससे तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और बच्चे नशे की प्रवृत्ति से दूर रहते हैं. उन्होंने बेंगलुरु सहित अन्य संस्थानों के शोध का भी हवाला दिया.
शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक संकेत
संकल्प का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत विद्यालयों में पहले से ही 'चेतना सत्र' संचालित करने का प्रावधान है. उन्होंने भरोसा दिया कि यदि आनापान ध्यान प्रक्रिया से बच्चों के स्वास्थ्य, एकाग्रता और व्यक्तित्व विकास में लाभ प्रमाणित होता है, तो शिक्षा विभाग इसकी उपयोगिता का अध्ययन कर जरूरी निर्णय लेगा. उन्होंने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों पर हमेशा विचार करती है.
नवनालंदा महाविहार के शोधकर्ताओं ने बताया उपयोगी
नवनालंदा महाविहार के शोधकर्ता डॉ. जितेंद्र कुमार और अमरेंद्र सहित अन्य विद्वानों ने भी इसे काफी उपयोगी बताया है. उनका कहना है कि आनापान बौद्ध परंपरा की प्राचीन ध्यान विधि है. इसे नियमित रूप से अपनाने पर बच्चों की स्मरण शक्ति, बौद्धिक क्षमता और भावनात्मक संतुलन में सुधार हो सकता है. यह प्रक्रिया दुनिया के कई देशों के शैक्षणिक संस्थानों में भी अपनाई जा रही है.
क्या है 10 मिनट की आनापान ध्यान प्रक्रिया
आनापान ध्यान में व्यक्ति शांत होकर बैठता है और लगभग 10 मिनट तक केवल अपनी प्राकृतिक सांस के आने और जाने का अवलोकन करता है. इसका उद्देश्य मन को वर्तमान क्षण में स्थिर रखना है. यदि सरकार से मंजूरी मिलती है, तो बिहार के सरकारी स्कूलों के चेतना सत्र में प्रतिदिन इसे शामिल किया जाएगा. शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बच्चों के अनुशासन और सीखने की क्षमता में सकारात्मक बदलाव आएगा.
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