Bihar Politics: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दल-बदल और राजनीतिक उठापटक पर बेबाक टिप्पणी की.
उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी किसी को तोड़कर नहीं ला रही है, बल्कि जो लोग अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर आ रहे हैं, वे अपनी मर्जी से रालोमो में शामिल हो रहे हैं. उनके इस बयान को बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बेहद अहम माना जा रहा है, जहां दलों के भीतर असंतोष और टूट की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में हैं.
टूटना उस पार्टी का, जाना उस व्यक्ति का फैसला
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी पार्टी में टूट हो रही है या नहीं, यह उस दल का आंतरिक मामला है. लेकिन जो व्यक्ति या नेता टूटकर कहीं और जाता है, वह उसका निजी और राजनीतिक निर्णय होता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि रालोमो किसी को जबरन या प्रलोभन देकर नहीं ला रही है. पार्टी में जो भी आ रहा है, वह अपनी सोच और राजनीतिक दिशा तय करके आ रहा है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा को लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा ने सकारात्मक रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जिस उद्देश्य से यात्रा पर निकले हैं, उसके लिए वे आभार व्यक्त करते हैं. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है. उनके इस बयान को एनडीए के भीतर मजबूती और विपक्ष पर दबाव की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है.
रालोमो में नए चेहरों की एंट्री
इसी प्रेस वार्ता के दौरान जदयू के पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. चंदन यादव सहित कई नेताओं ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा की सदस्यता ली. पार्टी कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रालोमो के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे. इसे पार्टी के संगठन विस्तार और जमीनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
नाराज विधायक और दही-चूड़ा भोज की राजनीति
इधर रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष से नाराज चल रहे विधायक रामेश्वर महतो और आलोक सिंह का भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में शामिल होना भी सियासी संकेत दे रहा है. दोनों विधायकों ने नितिन नवीन से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और इसे निजी संबंधों का हिस्सा बताया. उन्होंने यह जरूर कहा कि इस मुलाकात का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए, लेकिन राजनीति में ऐसी मुलाकातें हमेशा चर्चा का विषय बन जाती हैं.
रालोमो में सब कुछ ठीक या अंदरूनी हलचल?
उपेंद्र कुशवाहा का बयान जहां पार्टी की स्थिति को मजबूत दिखाने की कोशिश करता है, वहीं नाराज विधायकों की गतिविधियां यह इशारा करती हैं कि अंदरखाने कुछ असंतोष भी है. बिहार की राजनीति में यह दौर बयानबाजी और मुलाकातों से आगे बढ़कर आने वाले समय में बड़े समीकरणों का आधार बन सकता है.
फिलहाल इतना तय है कि “कौन टूट रहा है और कहां जा रहा है” वाला सवाल अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक चर्चा का केंद्र बन चुका है.
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