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Bihar Panchayat Election: तो क्या जून-जुलाई में होगा बिहार पंचायत चुनाव? जानिए- क्यों लगाए जा रहे ऐसे कयास

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
 बिहार पंचायत चुनाव
बिहार पंचायत चुनाव
Prabhat khabar

ted Bihar Panchayat Election: बिहार पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Election Date) की तारीखों के ऐलान होने का इंतजार कर रहे लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. छह अप्रैल को एक मामले में पटना हाई कोर्ट में सुनवाई है उसके बाद ही तारीखों के ऐलान को लेकर कोई खबर आ सकती है. इधर, बीच ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार पंचायत चुनाव अब जून-जुलाई से पहले संभव नहीं है.

ऐसा इसलिए क्योंकि अब चुनाव की अधिसूचना अप्रैल के पहले सप्ताह में भी जारी होने की उम्मीद नहीं है. बता दें कि पिछली बार पंचायत चुनाव 2016 की अधिसूचना फरवरी के अंत में ही जारी हो गई थी. इस बार राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की तैयारी तो समय पर शुरू कर दी, लेकिन चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर पेंच अभी तक फंसा है, मामला हाई कोर्ट में है. इस कारण से पंचायत चुनाव का निर्धारित समय पर होना अब असंभव होता जा रहा है.

Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव में क्यों फंसा पेच

बिहार पंचायत चुनाव पहली बार ईवीएम से कारने का फैसला लिया गया. ईवीएम बनाने वाली सरकारी कंपनी आपूर्ति के लिए भी तैयार है, लेकिन इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी है. केंद्रीय चुनाव आयोग इस पर अब तक सहमति नहीं दिया है. राज्य निरवाचन आयोग ने ईवीएम की आपूर्ती के लिए पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 6 अप्रैल को सुनवाई है.

अगर इस दिन ईवीएम का मसला सुलझ भी जाता है और खरीद प्रक्रिया पूरी होती है तो इसमें अप्रैल गुजर जाने की उम्मीद है. इसके बाद ईवीएम की जांच और चुनाव कर्मियों को इसका प्रशिक्षण देने में भी कम से कम एक माह का समय लगेगा. इस तरह मई का महीना भी गुजर सकता है. इसलिए जून-जलाई में पंचायत चुनाव कराने की संभावना है. हालांकि इस माह में बिहार में बारिश का दौर शुरू हो जाता है जो एक नयी परेशानी खड़ा करेगा.

Bihar Panchayat Chunav: 15 जून तक है मुखिया सहित सभी प्रतिनिधियों का कार्यकाल

इधर, खबर है कि चुनाव में संभवित देरी को देखते हुए राज्य सरकार पंचायती राज अधिनियम 2006 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन की तैयारी कर रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि 15 जून तक पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल है. इसके पहले नया निर्वाचन नहीं होने की स्थिति में मुखिया-प्रमुख आदि के अधिकार छिन जाएंगे.

ऐसे हालात में पंचायती राज व्यवस्था के तहत होने वाले कार्य अधिकारियों के जिम्मे होंगे. जब तक नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण नहीं हो जाता, तब-तक अधिकारी ही योजनाओं का क्रियान्वयन कराएंगे.

पंचायती राज अधिनियम में इसका प्रावधान नहीं किया गया है कि चुनाव में देरी होती है तो त्रि-स्तरीय व्यवस्था के तहत होने वाले कार्य किनके माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे, इसलिए अधिनियम में संशोधन किया जाना जरूरी होगा.चूंकि अभी विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया जाएगा. बाद में विधानमंडल सत्र से भी इसे पारित कराया जाएगा.

Posted By: Utpal Kant

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