Bihar News: देशभर में अपनाया जाएगा पटना का लोहिया पथचक्र मॉडल, NHAI और ओडिशा सरकार ने डिजाइन को सराहा

Patna's Lohia Pathchakra model will be adopted across the country.
Bihar News: अब पटना सिर्फ जाम की कहानियों के लिए नहीं, बल्कि ट्रैफिक समाधान के मॉडल के तौर पर पहचाना जाएगा. बेली रोड पर बना लोहिया पथचक्र देश के दूसरे शहरों के लिए मिसाल बनने जा रहा है.
Bihar News: राजधानी पटना के बेली रोड पर बना लोहिया पथचक्र अब राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है. पहली बार ऐसा हुआ है जब बिहार की किसी पुल परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने देश के अन्य शहरों में लागू करने का फैसला किया है.
इसके साथ ही ओडिशा सरकार भी इस मॉडल को अपनाने जा रही है और सबसे पहले भुवनेश्वर में लोहिया पथचक्र की तर्ज पर पुल और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा.
पटना पहुंची NHAI और ओडिशा सरकार की टीम
एनएचएआई और ओडिशा सरकार की संयुक्त टीम हाल ही में पटना पहुंची थी. टीम ने बेली रोड पर बने लोहिया पथचक्र का गहन अध्ययन किया और कम जगह में विकसित किए गए इसके डिजाइन की सराहना की.
अधिकारियों ने माना कि शहरी इलाकों में सीमित भूमि के बावजूद ट्रैफिक को सिग्नल-फ्री करने के लिए यह मॉडल बेहद कारगर साबित हुआ है. खास तौर पर हड़ताली मोड़ पर बने पथचक्र को ज्यादा प्रभावी बताया गया है.
10 किलोमीटर तक सिग्नल-फ्री सफर
लोहिया पथचक्र के निर्माण से दानापुर के सगुना मोड़ से लेकर हड़ताली मोड़ तक करीब 10 किलोमीटर की दूरी ट्रैफिक सिग्नल से मुक्त हो गई है. पहले जहां इस रूट पर हर चौराहे पर रुकना पड़ता था, अब वाहन बिना सिग्नल और यू-टर्न के सुगम तरीके से निकल रहे हैं. इसका असर न सिर्फ ट्रैफिक फ्लो पर पड़ा है, बल्कि ईंधन की बचत और समय की भी बड़ी राहत मिली है.
391 करोड़ में बना दो फेज का प्रोजेक्ट
लोहिया पथचक्र परियोजना को साल 2014-15 में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत 391 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी. हालांकि, निर्माण कार्य 2022-23 में शुरू हुआ, जिसके कारण लागत में बढ़ोतरी भी हुई. इस परियोजना को दो फेज में पूरा किया गया है.
पहला फेज बिहार लोक सेवा आयोग कार्यालय के सामने और दूसरा हड़ताली मोड़ पर विकसित किया गया.
फेज-1 और फेज-2 ने बदली कनेक्टिविटी
बीपीएससी के सामने बने फेज-1 के पूरा होने से बेली रोड की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया. सर्कुलर रोड अंडरपास से एयरपोर्ट, मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण इलाकों से वाहन सीधे बेली रोड तक पहुंचने लगे. पहले इन्हें बेली रोड पार करने के लिए यू-टर्न लेना पड़ता था.
फेज-2 यानी हड़ताली मोड़ पथचक्र में दारोगा राय पथ से आने-जाने के लिए दो लेन का निर्माण किया गया है, जिसे अंडरपास के जरिए बेली रोड और बोरिंग रोड से जोड़ा गया है. यहां तीन लेन को जोड़ने वाला अंडरपास बनाया गया है, जिससे बोरिंग रोड से आर ब्लॉक तक आवागमन और आसान हो गया है.
देश के लिए मॉडल बना पटना
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के एमडी जितेंद्र कुमार के अनुसार, यह पहली बार है जब बिहार और पटना की किसी पुल परियोजना को देशभर में अपनाने का निर्णय लिया गया है. एनएचएआई अब इसी तर्ज पर देश के अन्य शहरों में पुलों का निर्माण करेगा, जबकि ओडिशा सरकार भुवनेश्वर से इसकी शुरुआत करेगी. यह उपलब्धि पटना को शहरी ट्रैफिक प्रबंधन के एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित करती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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