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बिहार में घोड़परास और जंगली सूअरों को नष्ट करेंगे वन विभाग के शूटर, किसानों को मिलेगा 150 करोड़ रुपए डीजल अनुदान…

Updated at : 08 Aug 2024 10:06 AM (IST)
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bihar agriculture news | Bihar News: Forest department shooters will destroy Ghodparas and wild boars in Bihar

कृषि मंत्री मंगल पाण्डेय की फाइल फोटो

Bihar News: बिहार में जंगली सूअर और घोड़परासों की संख्या बढ़ गई है. इनके डर से बिहार के किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में कृषि मंत्री ने कहा कि अब दो सप्ताह के बाद इन जंगली सूअरों और घोड़परासों को नष्ट किया जाएगा.

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Bihar News: बिहार में जंगली सूअर और घोड़परासों की संख्या बढ़ गई है. इनके डर से बिहार के किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्यभर में जंगली सूअरों के आतंक से किसान आलू की खेती कम कर पा रहे हैं. घोड़परास खड़ी फसलों और बीज उत्पादन में बाधा बन रहे हैं. बिहार के अधिकांश इलाकों इस विषय पर किसानों की शिकायत आ रही है.

बता दें कि कृषि मंत्री ने आगे कहा कि अब दो सप्ताह के बाद इन जंगली सूअरों और घोड़परासों को नष्ट किया जाएगा. वन विभाग में लिस्टेड शूटर इन जंगली पशुओं को नष्ट करेंगे. मंत्री ने आगे बताया कि 30 जिलों में 2 लाख 95 हजार 866 घोड़परास और 67 हजार 255 जंगली सूअर हैं. जो किसानों को परेशान कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि बंदरों को भगाने पर भी विभाग विचार करेगा.

राज्यभर में हुई 81 फीसदी धान की रोपनी

मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि पूरे राज्य में 36.54 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इसमें 29.65 लाख हेक्टेयर में धान की रोपनी हो गई है. पूरे राज्यभर में लगभग 81 फीसदी धान की रोपनी हो चुकी है.

कटिहार, सहरसा, किशनगंज, गोपालगंज और अररिया में सर्वाधिक सौ फीसदी से अधिक धान रोपे जा चुके हैं. जमुई में 46 फीसदी बांका में 49, गया व नवादा में 54, औरंगाबाद में 55 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो सकी है.

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डीजल अनुदान के लिए 150 करोड़ रुपए आवंटित

मंत्री ने बताया कि बारिश की खराब स्थिति को देखते हुए डीजल अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इसके लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अब तक 32 हजार किसानों ने आवेदन किया है. 10 से 12 लाख रुपये का भुगतान किया गया है.

मंगल पाण्डेय ने आगे कहा कि हाइब्रिड बीज के उत्पादन और मार्केटिंग के लिए विभाग की ओर से नीति बनाई जा रही है. इससे राज्य में ही बीज उत्पादित होंगे. इससे बीज का मूल्य कम हो जाएगा.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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