बिहार में आशा मॉडल से दूर होगा सिंचाई का संकट, सोलर से होगी किसानों की कमाई

Updated at : 02 Apr 2026 7:16 AM (IST)
विज्ञापन
Bihar News

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार में जल संसाधन विभाग ने ‘आशा मॉडल’ के जरिए ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिससे सालभर खेतों को पानी मिलेगा और किसान सोलर पावर से अतिरिक्त कमाई भी कर सकेंगे.

विज्ञापन

Bihar News: बिहार के कृषि क्षेत्र में आशा मॉडल’ सूखे खेतों की प्यास बुझाएगी, बल्कि किसानों की जेब भी भरेगी. जल संसाधन विभाग ने एक अनोखा ‘आशा’ मॉडल विकसित किया है, जो पारंपरिक सिंचाई की चुनौतियों को हमेशा के लिए खत्म करने का दम रखता है.

पटना के पालीगंज से शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट राज्य के भविष्य की नई इबारत लिखने को तैयार है.

क्या है ‘आशा मॉडल’ और क्यों है खास?

राज्य सरकार द्वारा विकसित ‘आशा मॉडल’ एक ऐसी तकनीक है, जो सिंचाई के पारंपरिक और आधुनिक साधनों का संयोजन करती है. इसमें आहर-पइन जैसे पुराने जल स्रोतों का रिनोवेट कर उन्हें सोलर पावर सिस्टम से जोड़ा जाता है.अक्सर मानसून की बेरुखी या नहरों में पानी की कमी के कारण फसलें दम तोड़ देती थीं, लेकिन आशा मॉडल इस अंतर को पाट देगा.

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को सिंचाई के लिए अलग से खर्च नहीं करना होगा. सौर ऊर्जा से पंप चलेंगे और जरूरत के हिसाब से खेतों तक पानी पहुंचेगा.

पटना जिले के पालीगंज प्रखंड में इस योजना का पहला प्रयोग किया जा रहा है. यहां सात एकड़ के आहर का रिनोवेट किया गया है और उसके पास एक एकड़ में सोलर पावर प्लांट लगाया जा रहा है. नहर से पानी लाने के लिए 1.2 किलोमीटर लंबा चैनल बनाया जा रहा है. इसके साथ ही 30 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे खेतों तक सीधे पानी पहुंच सके. इस पूरे सिस्टम को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

कैसे मिलेगा सालभर पानी?

मानसून के दौरान या नहर में पानी आने पर उसे आहर में संग्रहित किया जाएगा. जब बारिश बंद हो जाएगी या नहर सूख जाएगी, तब सोलर पंप के जरिए उसी पानी को खेतों तक पहुंचाया जाएगा. इस प्रक्रिया से सिंचाई पूरी तरह मौसम पर निर्भर नहीं रहेगी और किसानों को हर समय पानी उपलब्ध होगा.

इस मॉडल से सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुलेगा. सोलर प्लांट से जो अतिरिक्त बिजली बनेगी, उसे राज्य की बिजली कंपनी खरीदेगी. इससे किसान को कार्बन क्रेडिट स्कोर मिलेगा, जिससे अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय आय के रास्ते भी खुलेंगे.

पालीगंज में सफलता मिलने के बाद इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू करने की योजना है. अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो बिहार में सिंचाई की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.

पर्यावरण और आय का अनोखा संगम

यह मॉडल न केवल आर्थिक रूप से सक्षम है, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी उतना ही संवेदनशील है. सौर ऊर्जा के उपयोग के कारण यह ‘स्वच्छ कार्बन’ तकनीक को बढ़ावा देता है.

आशा मॉडल बिहार के जल प्रबंधन और कृषि विकास के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है.

Also Read: बिहार के 80 हजार स्कूलों का बदलेगा टाइम टेबल, 6 अप्रैल से मॉर्निंग शिफ्ट, सुबह 6:30 बजे से लगेगी क्लास

विज्ञापन
Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन