बिहार में जमीन मापी ठप, अमीन संघ का बड़ा ऐलान-23 को पटना समेत जिलों में धरना

Updated at : 19 Mar 2026 11:22 AM (IST)
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Bihar News

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार राजस्व अमीन संघ ने अपनी मांगों को लेकर अब सख्त रुख अपना लिया है. संघ ने 20 मार्च को पूरे राज्य में काला बिल्ला लगाकर काम करने और 23 मार्च को पटना सहित सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देने का ऐलान किया है. इससे आने वाले दिनों में राजस्व से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं.

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Bihar News: बिहार में अमीन संघ ने अपनी मांगों को लेकर बिहार राजस्व अमीन संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 20 मार्च से अमीनों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध शुरू करने और फिर पटना की सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है.

अमीन संघ द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, 20 मार्च 2026 को पूरे प्रदेश के अमीन अपने हाथों पर काला बिल्ला बांधकर काम करेंगे. अगर इस चेतावनी के बाद भी विभाग नहीं जागा, तो 23 मार्च को सभी जिला मुख्यालयों पर महाधरना देकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा.

पे-लेवल 6 और सुविधाओं पर फंसा है पेंच

अमीन संघ की लड़ाई सिर्फ वेतन की नहीं, बल्कि उनके कार्य के तकनीकी स्वरूप को पहचान दिलाने की भी है. उनकी प्रमुख मांगों में वेतनमान (Pay Level-6) को लागू करना सबसे ऊपर है. इसके अलावा, अमीनों ने पोस्टिंग में पारदर्शिता, चेनमैन की स्थायी नियुक्ति और फील्ड वर्क के लिए उचित यात्रा भत्ते की मांग उठाई है.

संघ का कहना है कि आज के दौर में जब सारा काम डिजिटल हो रहा है, उन्हें तकनीकी कार्यों के अनुरूप जरूरी संसाधन और ‘डिजिटल भत्ता’ नहीं मिल रहा है, जिससे उन पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.

जमीन मापी से लेकर म्यूटेशन तक पर पड़ेगा असर

अमीनों की इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ने वाला है. बिहार में जमीन के बंटवारे, सीमांकन और सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरी तरह अमीनों पर निर्भर है.

23 मार्च को होने वाले जिला स्तरीय धरने से दाखिल-खारिज और एलपीसी जैसे जरूरी कामों में देरी हो सकती है. संघ ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि विभाग की वादाखिलाफी की वजह से कर्मियों में भारी असंतोष है और अब वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं.

उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

23 मार्च के धरने के बाद भी सरकार की नींद नहीं टूटी, तो आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल और पटना में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा.

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की बेरुखी ने उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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