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बिहार में शिक्षक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम पर कितना खर्च कर रही राज्य सरकार, जानिए

बिहार में शिक्षक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के आयोजन के लिए शिक्षा विभाग ने जिलों को राशि भेजी है. इस राशि को कार्यक्रम आयोजित करने के साथ ही बस के किराये पर भी खर्च किए जाएंगे. कुछ राशि को कार्यालय मद में खर्चना है.

बिहार लोक सेवा आयोग से चयनित 1.20 लाख से अधिक विद्यालय अध्यापकों को 2 नवंबर को पटना के गांधी मैदान और जिला मुख्यालयों में औपबंधिक नियुक्ति पत्र दिया जाएगा. इसके लिए भव्य तैयारी की गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस आयोजन पर राज्य सरकार कितने रुपये खर्च कर रही है. तो हम आपको बता दें कि इस नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के लिए शिक्षा विभाग ने जिलों के लिए तीन करोड़ 41 लाख रुपये की राशि भेजी है. इस राशि में से एक करोड़ 85 हजार रुपये बस किराये पर खर्च किये जायेंगे. मालूम हो कि राज्य के विभिन्न जिलों से बस से शिक्षकों को पटना के गांधी मैदान लाया जाएगा. वहीं, शेष दो करोड़ 41 लाख की राशि अन्य कार्यालयीन मद में खर्च किए जाने हैं.

पटना जिला को एक करोड़ 57 लाख

इस संबंध में विभाग ने अपने जारी आदेश में कहा है कि पटना के गांधी मैदान तथा अन्य जिला मुख्यालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के लिए यह राशि भेजी जा रही है. सबसे अधिक पटना जिला को एक करोड़ 57 लाख की राशि भेजी गयी है. दरअसल पटना जिला नियुक्ति पत्र वितरण समारोह आयोजित कर रहा है.

1.10 लाख शिक्षकों को मिलेगा नियुक्ति पत्र

गौरतलब है कि बिहार लोक सेवा आयोग से चयनित 1.10 लाख विद्यालय अध्यापकों को गुरुवार के दिन राजधानी पटना और जिला मुख्यालयों पर नियुक्ति पत्र बांटे जायेंगे. पटना के गांधी मैदान में अपराह्न तीन बजे से मुख्य समारोह आयोजित किया जायेगा. यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और सहयोगी मंत्री नव नियुक्त विद्यालय अध्यापकों को नियुक्ति पत्र बांटेंगे. वहीं जिला मुख्यालय स्तर पर आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को पटना में आयोजित समारोह से वर्चुअल मोड में जोड़ने के लिए कहा गया है. मुख्यमंत्री जब पटना में नियुक्ति पत्र बांटना शुरू करेंगे, उसी समय पर जिला मुख्यालयों पर नियुक्ति पत्र बांटने के आदेश दिये गये हैं. शिक्षा विभाग की तरफ से इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है.

शिक्षकों की नियुक्ति में कोई अनियमितता नहीं बरती गयी : मुख्यमंत्री

शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता के आरोपों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके विरोधी ऊपर से मिले निर्देश के अनुसार ऐसा आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कल एक बड़ा दिन है. जो गलतियां ढूंढ रहे हैं, उन्हें तब तक कोई समस्या नहीं हुई, जब तक वे मेरे साथ थे. अब उन्हें इतने अच्छे काम के खिलाफ बोलने के लिए ऊपर से आदेश मिल रहा है. बिहार में बहुत अच्छे ढंग से बहाली होती है. सब कुछ निष्पक्ष तरीके से होता है. इस बार हमने ही बीपीएससी से सब कुछ करवाया है. इतने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां हो रही हैं. सब लोग बहुत मेहनत से अच्छे से काम करेंगे.

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शिक्षक नियुक्ति इवेंट के नाम पर अपना चेहरा चमकाने का काम कर रही है महागठबंधन की सरकार : भाजपा

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में जहां एक तरफ पहले से बहाल शिक्षकों को सही समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, उन्हें राज्य कर्मी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है. वहीं महागठबंधन सरकार ने शिक्षक नियुक्ति इवेंट के नाम पर एक नया घोटाला कर रही है. कहा कि शिक्षक नियुक्ति इवेंट के नाम पर करोड़ों रुपए की बर्बादी की जा रही है. सिर्फ अपना चेहरा चमकाने एवं राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिये जनता के पैसों को लुटाया जा रहा है. अरविंद सिंह ने कहा है कि यहां एसटीइटी एवं अन्य अभ्यार्थियों के शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं है. लगातार उनके शिकायतों की अनदेखी होती आ रही है.

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