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बिहार में सेब की खेती के लिए सरकार दे रही अनुदान, जानिए कौन सी वेरायटी है यहां की मिट्टी के लिए उपयुक्त

Updated at : 26 Jul 2022 2:23 PM (IST)
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बिहार में सेब की खेती के लिए सरकार दे रही अनुदान, जानिए कौन सी वेरायटी  है यहां की मिट्टी के लिए उपयुक्त

बिहार में किसानों के विकास के लिए सरकार समय-समय पर कई योजनाएं बनाती है.बिहार में किसानों की आमदनी की दिशा में सरकार ने एक सरहानीय कदम उठाया है.बिहार सरकार किसानों को सेब की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

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बिहार में किसानों के विकास के लिए सरकार समय-समय पर कई योजनाएं बनाती है.बिहार में किसानों की आमदनी की दिशा में सरकार ने एक सरहानीय कदम उठाया है.जिससे किसानों को बहुत फायदा होगा. बिहार सरकार किसानों को सेब की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.जिसकी मदद से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी.बता दें कि भारत में सेब की खेती जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ही होती है.लेकिन अब सेब की खेती की शुरुआत बिहार राज्य में हो गई है.

सेब बिहार के मिट्टी में भी उगाया जा सकता है

बिहार के कई जिलों में हरमन-99 वेरायटी के सेब के पौधे लगाए जा रहे हैं.देखा जाए तो बिहार में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसी मिट्टी नहीं है.लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार हरमन- 99 वेरायटी की सेब बिहार के मिट्टी में भी उगाया जा सकता है.कृषि विभाग ने राज्य में सेब की खेती की संभावना को देखते हुए इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना शुरू की है. बेगूसराय, भागलपुर मुजफ्फरपुर,औरंगाबाद,वैशाली,कटिहार और समस्तीपुर के कुछ किसान अपने स्तर से सेब की खेती कर रहे हैं.

यहां की  मिट्टी में हो सकता है हरमन- 99 वेरायटी

हरमन- 99 वेरायटी की सेब बिहार के मिट्टी में भी उगाया जा सकता है.चाहे वह जमीन पथरीली,दोमट या फिर लाल ही क्यों न हो.पौधों की विकास भी अच्छी तरह से हो रहा है.ऐसा माना जा रहा है की बिहार में पैदा होने वाले सेब उसी टेस्ट,कलर और साइज का होगा जैसा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में होता है.सेब की खेती की लागत इकाई प्रति हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार 250 रुपए हैं. जो किसान इस खेती को करने के लिए इच्छुक हैं उन किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

नवंबर से फरवरी तक पौधे लगाने का सही समय

सेब की खेती के लिए नवंबर से फरवरी तक पौधे लगाने का सही समय होता है.हरिमन 99, एना, डोरसेट गोल्डन, माइकल और ट्रिपिकल स्वीट्स जैसी वेराइटी के लिए 40 से 50 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान सही होता है.सेब के पौधे लगाने के 2 साल बाद फूल आते हैं.दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई व जून में फल तैयार हो जाते हैं. बतादें की सेब का क्षेत्र विस्तार करने के लिए सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर पर ढाई लाख रुपये तीन किस्तों में देगी. पहली किस्त में अनुदान का 60 फीसदी मिलेगा.और बचा अनुदान दो समान किस्तों में दिया जाएगा.

मैदानी क्षेत्र के लिए हरिमन-99 को विकसित की गई है

डॉ राजेंद्र प्रसाद कृषि विवि, पूसा के निदेशक के अनुसार सेब की उन्नत खेती सामान्यत: ठंडे राज्यों में होती है. मैदानी क्षेत्र के लिए हरिमन-99 प्रजाति को विकसित की गई है.सेब की खेती के लिए किसानों को बिहार सरकार के वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा. इससे संबंधित विशेष जानकारी जिला के सहायक निदेशक उद्यान से लीया जा सकता है. सेब की खेती लिए जिन किसानों को चुना जाएगा.उन्हें वैशाली के देसरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग दी जाएगी. किसानों को हिमाचल प्रदेश से हरिमन 99 वेराइटी का पौधा दिलाया जाएगा. शिक्षण सहित एक पौधे की लागत लगभग 200 रुपए होंगे.

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