Bihar Electricity: सावधान! बिजली बिल में लापरवाही की तो अब सीधे CMO लेगा एक्शन, डैशबोर्ड से होगी निगरानी

Updated at : 06 Jan 2026 2:22 PM (IST)
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Bihar Electricity

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Bihar Electricity: बिजली कनेक्शन में देरी, बिल की शिकायतें और महीनों से लंबित मामला. अब ऐसी शिकायतें फाइलों में दबेंगी नहीं. बिहार में बिजली सेवाओं की तस्वीर बदलने जा रही है और इसकी कमान सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने हाथ में ले ली है.

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Bihar Electricity: बिहार सरकार ने ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य में बिजली की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं की मॉनीटरिंग अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्तर से होगी. इसका साफ संदेश है कि बिजली सेवाओं में देरी, लापरवाही और जवाबदेही की कमी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

बिजली सेवाओं पर सीएमओ की सख्त नजर

मुख्यमंत्री कार्यालय ने ऊर्जा विभाग को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि बिजली से जुड़ी सभी उपभोक्ता सेवाओं की नियमित और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जाए. नए कनेक्शन देने, मीटर लगाने, बिल से जुड़ी शिकायतों के निपटारे और पोल-लाइन से संबंधित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा. अब यह केवल विभागीय समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी रिपोर्ट सीधे सीएमओ के डैशबोर्ड पर पहुंचेगी.

ऑनलाइन डैशबोर्ड से होगी हर सेवा की ट्रैकिंग

सरकार एक ऐसे ऑनलाइन डैशबोर्ड के जरिए निगरानी करेगी, जहां हर जिले और हर क्षेत्र की बिजली सेवाओं की स्थिति रियल टाइम में दिखेगी. यह भी दर्ज होगा कि किस उपभोक्ता को सेवा मिलने में कितनी देरी हुई और उसकी वजह क्या रही. यदि देरी जानबूझकर या लापरवाही के कारण पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है.

जवाबदेही तय, बहाने नहीं चलेंगे

मॉनीटरिंग टीम यह भी जांचेगी कि सेवा में देरी संरचनात्मक समस्या के कारण हुई या प्रशासनिक लापरवाही से. सरकार का मानना है कि लंबे समय से जवाबदेही की कमी के कारण उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता रहा है. अब हर देरी का कारण दर्ज होगा और उसी आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी. इससे उपभोक्ताओं का भरोसा सिस्टम पर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

इसी बीच बिहार विद्युत नियामक आयोग पटना में मंगलवार को जनसुनवाई करेगा. इसमें बिजली दरों, नई नीतियों और अन्य बिजली संबंधी मुद्दों पर उपभोक्ताओं और हितधारकों की राय ली जाएगी. बिजली कंपनियां अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता आयोग के सामने रखेंगी, जबकि उपभोक्ताओं को आपत्ति और सुझाव रखने का मौका मिलेगा. इसके बाद आयोग अंतिम फैसला लेगा.

उपभोक्ताओं को क्या बदलेगा?

सीएमओ स्तर की निगरानी से सरकार को उम्मीद है कि बिजली सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों का निपटारा समय पर होगा. यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सरकार अब उपभोक्ता अनुभव को प्राथमिकता देने के मूड में है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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