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'बंदूकबाज बिटिया' ने दिल्ली में बढ़ाया बिहार का मान, स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड पर साधा निशाना

Updated at : 28 Sep 2022 8:13 PM (IST)
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'बंदूकबाज बिटिया' ने दिल्ली में बढ़ाया बिहार का मान, स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड पर साधा निशाना

‍Bihar: निशानेबाजी में परचम लहराने वाली शशि पांडेय गोपालगंज के कटेया थाना क्षेत्र के ओझवलिया गांव की रहनेवाली हैं. शशि ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता है.

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बिहार: कहते हैं कि कुछ कर गुजरने का जुनून और जज्बा हो तो संसाधन सुविधाएं मायने नहीं रखती, कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के गोपालगंज जिले के एक छोटे से गांव ओझावलिया की रहनेवाली शशि पांडेय ने. दरअसल, शशि ने दिल्ली में हुए 37वें स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में बिहार के लिए गोल्ड मेडल जीता है. अभाव में संघर्ष कर कामयाबी पाने वाली इस बेटी की पूरी कहानी पढ़िये इस खास खबर में…

सटीक निशाना साधकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया

निशानेबाजी में परचम लहराने वाली शशि पांडेय गोपालगंज के कटेया थाना क्षेत्र के ओझवलिया गांव की रहनेवाली हैं. शशि ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता है. देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित इस नौ दिवसीय प्रतियोगिता में 1150 निशानेबाज़ो ने पिस्टल, रायफल और शॉटगन शूटिंग के अलग-अलग श्रेणियों में हिस्सा लिया था. जिसमें शशि पाण्डेय, गायत्री कौर और माधवी की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल के टीम इवेंट में एकदम सटीक निशाना साधकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

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किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं शशि

बता दें कि शशि पांडेय एक निम्न मध्यवर्गीय किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढाई पूरी की और दिल्ली में कॉलेज के दौरान ही एनसीसी का प्रशिक्षण लिया और उसी के बाद शशि का रुझान शूटिंग की तरफ हो गया. ..उसके बाद से बिहार की बेटी शशि ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. शशि ने खुद को शूटिंग के लिए पूरी तरीक से समर्पित कर दिया है.

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लड़कियों का खेल में आना जरूरी- शशि

शूटिंग को अपने जीवन का लक्ष्य बना चुकी शशि बताती हैं कि पहली बार जब पिस्टल उठाया तो थोड़ा डर लगा था, लेकिन जैसे-जैसे निशाना लगता गया, डर खत्म होता गया और आत्मविश्वास बढ़ता चला गया, इसलिए मैं मानती हूं कि लड़कियों का खेल में आना बहुत ज़रूरी है. शशि पाण्डेय बताती हैं कि शूटिंग बहुत महंगा खेल है. इसमें पिस्टल से लेकर गोली और ट्रेनिंग काफी महंगी होती है. एक किसान परिवार की लड़की के लिए इन सब खर्चों वहन कर पाना संभव नहीं है. वह ऐसे गांव से भी आती है जहां दो दशक में किसी लड़की ने बंदूक उठाया तक नहीं है.

बता दें कि दिल्ली में शशि को उनके कोच ईशविंदरजीत सिंह का साथ मिला और उसके बाद शशि ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. शशि बताती हैं कि थोड़ी मुश्किलें आती हैं, लेकिन मेरा सपना है ओलंपिक में भारत के लिए खेलना और देश के साथ- साथ बिहार का नाम रौशन करना.

‘नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की है तैयारी’

शशि पाण्डेय बीते कुछ सालों में दर्जनों मेडल जीत चुकी हैं और अब तैयारी नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की है. शशि की इस सफलता से उनके माता-पिता और बड़ी बहन की काफी उत्साहित हैं. शशि के पिता शारदानंद पांडेय ने भावुक होकर कहा कि बेटी और बेटा में कोई फर्क नहीं है. बेटी की रूचि शुरू से ही गन चलाने में थी और आज स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल पाकर शशि ने बिहार का नाम रोशन किया है. जरूरत है ऐसे बेटियों को सरकार से मदद की, ताकि नेशनल और ओलंपिक गेम खेलकर देश का नाम रोशन कर सकें. वहीं, शशि पांडेय की मां और बड़ी बहन ने भी शशि की सफलता से काफी उत्साहित हैं.

गोपालगंज से अवधेश कुमार की रिपोर्ट

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