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15000 करोड़ की इस परियोजना से हर खेत तक पहुंचेगा पानी, बिहार सरकार के प्लान से किसानों के घर आएगी खुशहाली

Updated at : 03 Feb 2026 3:56 PM (IST)
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Bihar Budget 2026

सांकेतिक फोटो

Bihar Budget 2026: खेती, पेयजल और बाढ़. तीनों की चुनौती से जूझते राज्य में बिहार बजट 2026 के तहत जल संसाधन और लघु जल संसाधन विभाग ने दीर्घकालिक नीति बनाई हैं. जल-जीवन-हरियाली अभियान से लेकर कोसी और गंडक जैसी नदियों पर चल रही योजनाएं यह संकेत दे रही हैं कि सरकार अब जल प्रबंधन को तात्कालिक राहत नहीं, स्थायी समाधान के रूप में देख रही है.

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Bihar Budget 2026: भू-जल रिचार्ज, हर खेत तक पानी और बाढ़ नियंत्रण. बिहार में पानी अब संकट नहीं, सिस्टम बनने की कोशिश में. राज्य सरकार ने ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ पहुंचाने के संकल्प को हकीकत में बदलने के लिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी परियोजनाओं पर मुहर लगा दी है.

कोशी-मेची लिंक से लेकर गंगा जल को जलाशयों तक पहुंचाने की इस मुहिम से न केवल बाढ़ का खतरा कम होगा, बल्कि बिहार के उन इलाकों में भी हरियाली लहलहाएगी जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता था.

जल-जीवन-हरियाली से भूगर्भ जल में सुधार

वित्तीय वर्ष 2025-26 में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अब तक 163 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है. इन योजनाओं के क्रियान्वयन से भूगर्भ जल के पुनर्भरण में सुधार देखा जा रहा है. आहर-पईन और तालाबों की मेढ़ पर किए जा रहे वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र बढ़ा है, जिससे जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिल रही है.

निजी नलकूप और हर खेत तक सिंचाई

मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत लक्ष्य के अनुरूप 35 हजार अनुदान आधारित नलकूप लगाए जा चुके हैं, जिससे करीब 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिली है.

वहीं ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ योजना के अंतर्गत 2025-26 में स्वीकृत सात नई योजनाओं से 3,730 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ने के साथ भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है.

कोसी से गंडक तक, सिंचाई नेटवर्क का विस्तार

जल संसाधन विभाग के अनुसार चयनित 604 योजनाओं में से लगभग सभी पूरी कर 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई बहाल की जा चुकी है. इसके अलावा 774 योजनाओं के जरिए 5.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई पुनर्स्थापन का कार्य चल रहा है.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कोशी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण का काम शुरू हो चुका है, जिससे अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार के 2.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा और बाढ़ का प्रभाव भी घटेगा.

बांध, जलाशय और शहरों के लिए गंगा-सोन जल

बांका और मुंगेर में गंगा के अधिशेष जल को बदुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाने की योजना पर काम जारी है. जमुई में बरनार जलाशय और पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली के पुनर्स्थापन से लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी.

गंगा जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण में नवादा और बिहारशरीफ को गंगा जल देने के लिए मधुबन जलाशय का निर्माण हो रहा है. सोन नदी से औरंगाबाद, डिहरी और सासाराम को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना भी प्रगति पर है.

विश्व बैंक की मदद और बाढ़ से सुरक्षा का ‘कवच’

बिहार के जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए विश्व बैंक ने भी हाथ आगे बढ़ाया है. 4,415 करोड़ रुपये की ‘बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना’ को मंजूरी मिल गई है, जिससे राज्य का नहर तंत्र पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक होगा.

मानसून 2026 से पहले नदियों के किनारे बसे गांवों को सुरक्षा देने के लिए 447 करोड़ रुपये की 216 कटाव निरोधक योजनाएं तैयार की गई हैं. सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा कर बिहार को वाटर सरप्लस राज्य बनाना है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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