Bhojpur: जय मां काली मंदिर बखोरापुर वाली की है अपार महिमा, कहानी जान उड़ जायेंगे होश
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 27 Oct 2024 7:05 AM
Bhojpur: भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर पंचायत स्थित बखोरापुर गांव में मां काली का प्रसिद्ध मंदिर है. आरा रेलवे स्टेशन से ऑटो से गांगी पहूंचकर विभिन्न वाहन मंदिर तक जाने के लिए मिलते हैं. आइये इस मंदिर की कहानी जानते हैं...
Bhojpur: भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत बखोरापुर में मां काली का भव्य मंदिर है. यह मंदिर आज से करीब 152 साल पूर्व छोटा रुप में चर्चा में आया था जब वर्ष 1862 में बखोरापुर गांव में हैजा फैला था. जिससे तीन सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग बीमार थे. उसी समय गांव में एक साधु आए. उन्होंने मां काली की पिंड स्थापना करने की बात कही. साथ ही ये भी कहा कि ऐसा करने से यह बीमारी रुक जाएगी. साधु के कहने पर गांव के बड़े-बुजुर्गों ने नीम के पेड़ के पीछे मां काली की नौ पिंड स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी. इसके बाद वो साधु चंद दिनों बाद अदृश्य हो गए. साथ ही हैजा भी गांव से धीरे-धीरे समाप्त हो गया.
जाने का रास्ता
यह मंदिर आरा रेलवे स्टेशन से लगभग 12 किमी उत्तर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर पंचायत में स्थित है. आरा रेलवे स्टेशन से ऑटो से गांगी पहूंचकर विभिन्न वाहन मंदिर तक जाने के लिए मिलते हैं. मंदिर परिसर के आसपास पूजा सामग्री, होटल, बैंक, एटीएम के साथ अन्य सुविधाएं उपल्बध हैं. जहां भक्तों के लिए हर संभव सहायता मुहैया की जाती है. इसको लेकर मंदिर के पुजारी बिष्णु बाबा ने बताया कि यहां पर पूजा पाठ प्राचीन समय में घटित घटनाओं के समय से ही रही है. यहां जो श्रद्धालु भक्त आते हैं मां उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं, नवरात्र में खासकर मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालु भक्तों के लिए हर रोज प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाती है. इस दौरान देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आकर यहां मां के दर्शन करते हैं.

विदेशों से आते हैं भक्त
बखोरापुर मां काली मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बीडी सिंह ने बताया कि जब से यह मंदिर बना है, तब से गांव में लोग दूर-दूर से, यहां तक कि विदेशों से भी भक्त पूजा करने आते हैं. माना जाता है कि वो मां से जो भी मन्नत मांगते हैं, वो मांग पूरी हो जाती है. वहीं, हर वर्ष मंदिर प्रबंधन की ओर से बड़े स्वास्थ शिविर का आयोजन समेत कई सामाजिक सरोकार के काम भी किए जाते हैं. मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है जिसके कारण यह मंदिर देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चित है. हर वर्ष 2 अप्रैल को बखोरापुर काली मंदिर में विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जाता है और 2004 से लगातार हर वर्ष इस का भव्य आयोजन किया जाता है. जिसमें भोजपुरी सहित सिने जगत के अनेक विश्व प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं.

2004 में जुटी थी दो लाख लोगों की भीड़
2004 के अप्रैल में बखोरापुर मंदिर में राष्ट्रीय मां काली सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान लगभग दो लाख लोगों की भीड़ जुटी थी. तब से लगातार हर वर्ष भक्ति जागरण का आयोजन होता है. नवरात्र में खासकर मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालु भक्तों के लिए हर रोज प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाती है. इस दौरान देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आकर यहां मां के दर्शन करते हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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