असम विमान हादसे में बिहार के दो लाल शहीद, वीडियो कॉल के दो घंटे बाद ही आ गई मौत की खबर
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Jun 2026 9:35 PM
भोजपुर के अग्निवीर जवान दानिश आलम और जहानाबाद के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की तस्वीर
IAF Plane Crash: असम के जोरहाट एयरबेस पर शनिवार को वायुसेना का AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया. इस दर्दनाक हादसे में बिहार के दो जांबाज जवानों, भोजपुर के अग्निवीर दानिश आलम और जहानाबाद के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार समेत कुल 5 जवान शहीद हो गए. वायुसेना ने जांच के आदेश दिए हैं.
IAF Plane Crash: असम के जोरहाट स्थित रौरिया इंडियन एयरबेस पर शनिवार सुबह 10 बजे लैंडिंग के समय वायुसेना का एक AN-32 मालवाहक विमान हादसे का शिकार हो गया. इस दर्दनाक दुर्घटना में विमान के पायलट सहित 5 बहादुर जवान शहीद हो गए, जबकि एक को-पायलट गंभीर रूप से घायल है. देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन शहीदों में बिहार के दो जांबाज लाल भी शामिल हैं.
इनमें भोजपुर जिले के अग्निवीर जवान दानिश आलम और जहानाबाद के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार शामिल हैं. यह हादसा उस समय हुआ जब विमान एयरबेस पर उतरने का प्रयास कर रहा था. लैंडिंग के दौरान विमान अचानक क्रैश होकर दो हिस्सों में टूट गया और उसमें भीषण आग लग गई.
भारतीय वायुसेना ने बताया कि यह विमान एक सामान्य रूटीन उड़ान पर था और हादसे के असली कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं.
भोजपुर का इकलौता चिराग बुझा, पिछले साल ही अग्निवीर बने थे दानिश
भोजपुर जिले के कोईलवर के कायमनगर गांव के रहने वाले 22 वर्षीय दानिश आलम इस हादसे में शहीद हो गए. दानिश अक्टूबर 2025 में ही अग्निवीर जवान के रूप में भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने थे. वे अपने माता-पिता मो. फारूक आलम और अख्तरी बेगम के इकलौते बेटे थे. दानिश के पिता गीधा स्थित एचपीसीएल प्लांट में एक साधारण ऑपरेटर हैं.
परिवार की माली हालत बहुत अच्छी नहीं होने के कारण दानिश की यह नौकरी पूरे घर के लिए एक बड़ा सहारा और नई उम्मीद लेकर आई थी. दानिश ने 29 जून 2025 को बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पर जॉइनिंग की थी, जिसके बाद उन्हें ट्रेनिंग के लिए कर्नाटक के बेलगांव भेजा गया था. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग असम के इसी जोरहाट एयर बेस पर हुई थी.
छुट्टी बिताकर 30 मई को ही लौटे थे ड्यूटी पर, घर में पसरा सन्नाटा
शहीद दानिश आलम अभी हाल ही में 23 मई 2026 को छुट्टी लेकर अपने गांव कायमनगर आए थे. परिवार के साथ एक हफ्ता बिताने के बाद वे 30 मई को ही वापस अपनी ड्यूटी पर लौटे थे. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि दानिश की यह मुलाकात आखिरी साबित होगी. दानिश की शहादत की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया है.
इकलौते बेटे को खोने के गम में मां अख्तरी बेगम बार-बार बेसुध हो जा रही हैं, वहीं उनकी बड़ी बहनें शगुफ्ता परवीन और गजाला परवीन का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव और आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं. ग्रामीण दानिश को एक बेहद होनहार, अनुशासित और सीधे सरल स्वभाव का लड़का बता रहे हैं.

जहानाबाद के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम भी शहीद, हादसे से दो घंटे पहले हुई थी बात
इस विमान हादसे में शहीद होने वाले बिहार के दूसरे लाल जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव के रहने वाले शुभम कुमार (26) हैं. शुभम ने साल 2021 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं शुरू की थीं. शुभम के भाई सत्यम ने बताया कि शुरुआत में उन्हें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से कुछ भ्रामक और गलत जानकारियां मिली थीं. इसके बाद जब उन्होंने सच्चाई जानने के लिए सीधे शुभम के मोबाइल नंबर पर फोन किया, तब जाकर उन्हें इस रूह कंपा देने वाली घटना की आधिकारिक जानकारी मिली.
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‘जल्दबाजी में हूं, बाद में बात करता हूं’ थे शुभम के आखिरी शब्द
सत्यम ने रोते हुए बताया कि शनिवार को हादसे से ठीक दो घंटे पहले ही उनकी शुभम से वीडियो कॉलिंग के जरिए बात हुई थी. उस बातचीत के दौरान शुभम ने बहुत ही सामान्य ढंग से कहा था कि वह अभी किसी जरूरी काम की वजह से थोड़ी जल्दबाजी में हैं और जैसे ही उन्हें फुर्सत मिलेगी, वे दोबारा फोन करके बात करेंगे. लेकिन इसके बाद शुभम का फोन कभी नहीं आया. इस विमान हादसे में बिहार के इन दो बेटों के अलावा स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा और अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत ने भी देश के लिए अपनी जान गंवाई है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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