TMBU अतिथि शिक्षक नियुक्ति विवाद: जांच समिति गठन के 12 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

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TMBU अतिथि शिक्षक नियुक्ति विवाद: जांच समिति गठन के 12 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

टीएमबीयू में अतिथि शिक्षक नियुक्ति में कथित धांधली की जांच समिति गठन के 12 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी है. 70 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने के बाद अब अधिकारियों, कर्मचारियों और चयन समिति की भूमिका की जांच होनी है.

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भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट.

TMBU Guest Teacher Recruitment Scam: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में वर्ष 2025 की अतिथि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में कथित धांधली की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जांच समिति गठित किए जाने के 12 दिन बाद भी संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच लंबित है. जबकि समिति को गठन के एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था.

मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता बरतने वाले अधिकारी और कर्मचारी अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं.

19 जून को गठित हुई थी तीन सदस्यीय जांच समिति

लोकभवन के निर्देश पर टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के आदेश के बाद रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे ने 19 जून को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था.

समिति में शामिल हैं.

  1. संयोजक – प्रो. सच्चिदानंद पांडेय (सीसीडीसी).
  2. सदस्य – प्रो. कमल प्रसाद (पीजी भौतिकी विभाग).
  3. सदस्य – प्रो. एच.के. चौरसिया (वनस्पति विज्ञान विभाग).

विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति से सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी है.

70 अतिथि शिक्षकों को हटाया जा चुका है

गौरतलब है कि अतिथि शिक्षक नियुक्ति में धांधली के आरोपों की पूर्व जांच रिपोर्ट के आधार पर लोकभवन ने 70 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी थी. अब उसी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जानी है.

दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की होगी जांच

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार जांच समिति नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करेगी. अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों और अन्य अभिलेखों पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हस्ताक्षरों का मिलान किया जाएगा.

इसके अलावा तत्कालीन कुलपति प्रो. जवाहर लाल द्वारा गठित स्क्रीनिंग कमेटी की भूमिका भी जांच के दायरे में होगी. आरोप है कि स्क्रीनिंग प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई थी.

गोपनीय तरीके से हुई थी चयन प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार पूरी चयन प्रक्रिया कुलपति आवासीय कार्यालय में गोपनीय तरीके से संपन्न कराई गई थी. इसके अलावा एक कॉलेज और एक पीजी विभाग में भी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कार्य किए गए थे. जांच समिति इन सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी.

सेलेक्शन कमेटी की भूमिका भी संदेह के घेरे में

नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. आरोप है कि चयन समिति के विशेषज्ञों ने सादे कागज पर पेंसिल से अंक दिए थे, जिनमें बाद में हेरफेर कर कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जबकि अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थियों को चयन सूची से बाहर कर दिया गया.

प्रभारी कुलपति से नहीं हो सका संपर्क

मामले में टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

मुख्य बिंदु

  1. टीएमबीयू में अतिथि शिक्षक नियुक्ति मामले की जांच अब तक शुरू नहीं हुई.
  2. जांच समिति गठन के 12 दिन बाद भी रिपोर्ट लंबित.
  3. 19 जून को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था.
  4. पहले ही 70 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति रद्द हो चुकी है.
  5. अधिकारियों और कर्मचारियों के हस्ताक्षरों की जांच होगी.
  6. स्क्रीनिंग और सेलेक्शन कमेटी की भूमिका भी जांच के घेरे में.
  7. अंकों में हेरफेर कर चयन किए जाने का आरोप.
  8. प्रभारी कुलपति का पक्ष नहीं मिल सका.
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Arfin Zubair

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By Arfin Zubair

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