सुलतानगंज में 32 साल बाद लौटेगी गंगा की पुरानी धारा, केंद्र की मंजूरी के बाद शुरू होगा 156 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम

सुलतानगंज गंगा परियोजना
Sultanganj Uttarvahini Ganga Project: 32 साल के लंबे इंतजार के बाद सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा की पुरानी धारा को फिर से जीवित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. करोड़ों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है क्योंकि भारत सरकार की मंजूरी से 156 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू होने वाली है.
भागलपुर से संजीव झा की रिपोर्ट
Sultanganj Uttarvahini Ganga Project: भागलपुर जिले के सुलतानगंज से करोड़ों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. करीब 32 साल बाद उत्तरवाहिनी गंगा की पुरानी धारा को फिर से जीवित करने की तैयारी शुरू हो गई है. पिछले 15 महीनों से रुकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सशर्त मंजूरी मिल गई है. इसका मतलब है कि लंबे इंतजार के बाद अब वह काम दोबारा शुरू होगा, जिसका सपना वर्षों से स्थानीय लोग और प्रशासन देख रहे थे.
यह सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं है. यह सुलतानगंज की धार्मिक पहचान, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और करोड़ों कांवरियों की सुविधा से जुड़ा ऐसा बदलाव है, जो आने वाले वर्षों में पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकता है.
15 महीने से क्यों रुका था काम, अब कैसे मिली मंजूरी
उत्तरवाहिनी गंगा की पुरानी धारा को पुनर्जीवित करने का काम वन्यजीव संबंधी अनुमति नहीं मिलने के कारण लगभग 15 महीने से रुका हुआ था. क्योंकि यह पूरा क्षेत्र विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के अंतर्गत आता है, इसलिए परियोजना शुरू करने से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी थी.
भागलपुर प्रमंडल ने 21 मार्च 2025 को वन मंत्रालय को वाइल्ड लाइफ क्लियरेंस के लिए आवेदन भेजा था. इसके बाद राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 89वीं बैठक में इस परियोजना पर विस्तार से विचार किया गया. समिति की अनुशंसा के आधार पर अब 25 हेक्टेयर क्षेत्र में इस परियोजना को सशर्त स्वीकृति मिल गई है.
बिहार सरकार के मुख्य वन्यजीव वार्डन अभय कुमार ने 8 जुलाई को एजेंसी को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य मंत्रालय द्वारा तय सभी 12 शर्तों का पालन करते हुए ही किया जाएगा.
32 साल पहले जहां बहती थी गंगा, वहीं लौटेगी मुख्य धारा
स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 32 वर्ष पहले जिस पुरानी धारा से गंगा का मुख्य प्रवाह होता था, समय के साथ उसका स्वरूप बदल गया. इससे उत्तरवाहिनी गंगा घाट की प्राकृतिक संरचना भी प्रभावित हुई.
अब इसी पुरानी धारा में फिर से जलप्रवाह सुनिश्चित करने के लिए करीब 30 मीटर चौड़ा और लगभग 2000 मीटर लंबा चैनल बनाया जाएगा. इस चैनल को मुख्य नदी से जोड़ा जाएगा ताकि पानी का प्रवाह फिर से शुरू हो सके.
यह कदम केवल नदी की पुरानी धारा को पुनर्जीवित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे धार्मिक गतिविधियों, पर्यटन और नदी तट के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.
156 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगा सुलतानगंज घाट का पूरा स्वरूप
करीब 156 करोड़ रुपये की इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद सुलतानगंज का उत्तरवाहिनी गंगा तट आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा.
अजगैवीनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और श्रावणी मेले में पहुंचने वाले लाखों कांवरियों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाएं मिलेंगी.
प्रोजेक्ट के तहत पुरानी धारा के किनारे पक्का सीढ़ी घाट बनाया जाएगा. नदी किनारे आकर्षक रिवर फ्रंट प्रोमेनेड विकसित होगा. श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम, आधुनिक शौचालय, पेयजल व्यवस्था, हाईमास्ट लाइट, बैठने की जगह, शेड और व्यापक सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा.
इसके अलावा कृष्णगढ़ रोड से अजगैवीनाथ मंदिर तक सीढ़ियों का निर्माण होगा. चैनल के किनारे पांच मीटर चौड़ा पाथवे बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिल सके. दाहिने तट पर कटाव रोकने के लिए लगभग एक हजार मीटर क्षेत्र में सुरक्षा कार्य भी किए जाएंगे. पूरे इलाके में इलेक्ट्रिफिकेशन और टॉयलेट कॉम्प्लेक्स का भी निर्माण होगा.
डॉल्फिन अभयारण्य होने के कारण रखी गईं सख्त शर्तें
चूंकि यह प्रोजे क्टविक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के भीतर है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है.
निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में डॉल्फिन या अन्य वन्यजीवों के आवास को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. निर्माण कार्य के दौरान नदी में मलबा नहीं डाला जाएगा. निकाले गए अवशेषों का सुरक्षित स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना होगा.
नदी में किसी भी प्रकार का प्लास्टिक, ठोस या तरल कचरा अथवा मल-मूत्र डालने पर रोक रहेगी. निर्माण कार्य केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही होगा. रात में अभयारण्य क्षेत्र में रोशनी नहीं की जाएगी ताकि वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां प्रभावित न हों.
निर्माण के दौरान शोर का स्तर भी निर्धारित सीमा के भीतर रखना होगा. यदि मुख्य वन्यजीव वार्डन भविष्य में कोई अतिरिक्त शर्त लागू करते हैं तो एजेंसी को उसका भी पालन करना होगा. इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के सभी संबंधित आदेशों का अनुपालन भी अनिवार्य रहेगा.
स्थानीय लोगों और कारोबारियों को क्या होगा फायदा
सुलतानगंज बिहार के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है. श्रावणी मेला के दौरान यहां देशभर से लाखों कांवरिये पहुंचते हैं. बेहतर घाट, सुरक्षित आवागमन और आधुनिक सुविधाएं मिलने से श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर होगा.
इस प्रोजेक्ट से स्थानीय होटल, दुकान, नाविक, परिवहन व्यवसाय और छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
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Sultanganj Uttarvahini Ganga Project: अगले सावन तक दिख सकता है बड़ा बदलाव
प्रशासन की योजना है कि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो जाए तो अगले सावन तक उत्तरवाहिनी गंगा घाट का बदला हुआ स्वरूप लोगों को देखने को मिल सकता है.
हालांकि पूरी प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय की सभी शर्तों का कितनी गंभीरता से पालन करती है और काम तय समयसीमा में पूरा हो पाता है या नहीं.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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