bhagalpur news. पर्यावरण दबावों के बीच भी उत्पादक बनाए रखना आवश्यक

Published by : ATUL KUMAR Updated At : 19 Feb 2026 12:55 AM

विज्ञापन

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन प्राकृतिक, संसाधन, संरक्षण एवं प्रबंधन अकादमी लखनऊ और बीएयू के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है

विज्ञापन

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन प्राकृतिक, संसाधन, संरक्षण एवं प्रबंधन अकादमी लखनऊ और बीएयू के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है. सम्मेलन के माध्यम से दोनों विश्वविद्यालय के द्वारा सुदृढ़ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से संसाधन संरक्षण आधारित कृषि एवं पर्यावरण स्थिरता विषय पर जोर दिया जा रहा है. देश के विभिन्न राज्यों से आये वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति में इस सम्मेलन की शुरुआत की गयी. उद्घाटन सत्र की शुरुआत आयोजन सचिव डॉ अंशुमान कोहली के स्वागत संबोधन से हुआ. उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के संदर्भ में सुदृढ़ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया. कहा कि टिकाऊ मृदा प्रबंधन कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय सुरक्षा की आधारशिला है. तथा संसाधन संरक्षण आधारित वैज्ञानिक तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाना समय की आवश्यकता है. प्राकृतिक संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन अकादमी लखनऊ के अध्यक्ष डॉ एके सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए संसाधन संरक्षण तकनीक तथा सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. इस दौरान कई प्रकाशन का विमोचन किया गया. मुख्य अतिथि बिधन चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति डॉ विश्वपति मंडल ने कृषि तंत्र के लचीलापन की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि मृदा और कृषि प्रणालियों को जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण दबावों के बीच भी उत्पादक बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ डीके शर्मा ने मृदा पुनर्वास, लवणता प्रबंधन के बारे में बताया. सम्मेलन का मुख्य व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से अर्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ हिमांशु पाठक द्वारा दिया गया. बीएयू सबौर के कुलपति डॉ डीआर सिंह ने मृदा विज्ञान अनुसंधान को सशक्त बनाने और संसाधन संरक्षण आधारित नवाचारों को किसानों तक पहुंचाने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहरायी. कार्यक्रम मं देश के सबसे समृद्ध किसान डॉ राजाराम त्रिपाठी अतिथि के रूप में शामिल हुए. डॉ राजाराम त्रिपाठी छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के रहने वाले है और खेती से करोड़ों की कमाई करते है. सत्र समापन मृदा वैज्ञानिक डॉ सागर द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

विज्ञापन
ATUL KUMAR

लेखक के बारे में

By ATUL KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन