ePaper

bhagalpur news. शारीरिक निष्क्रियता व धूप नहीं मिलने से अवसाद व माइग्रेन के मरीजों की संख्या बढ़ी

Updated at : 25 Dec 2025 11:09 PM (IST)
विज्ञापन
bhagalpur news. शारीरिक निष्क्रियता व धूप नहीं मिलने से अवसाद व माइग्रेन के मरीजों की संख्या बढ़ी

ठंड बढ़ने के साथ ही मानसिक रोगियों की संख्या अस्पताल में बढ़ने लगी है. खासकर अवसाद व माइग्रेन के रोगियों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गयी है.

विज्ञापन

ठंड बढ़ने के साथ ही मानसिक रोगियों की संख्या अस्पताल में बढ़ने लगी है. खासकर अवसाद व माइग्रेन के रोगियों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गयी है. विशेषज्ञों की मानें तो इसका मूल कारण ठंड में शारीरिक निष्क्रियता व शरीर को धूप नहीं मिलना है. शारीरिक व्यायाम से कर सकते हैं बचाव, मोबाइल के इस्तेमाल से बचने की है जरूरत मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज मनस्वी ने बताया कि मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ गयी है. इसका मूल कारण कम तापमान के कारण मेटाबोलिज्म का स्लो होना है. इसके अलावा शारीरिक निष्क्रियता, धूप नहीं मिलना, काम पर जाने की इच्छा नहीं होना, शरीर में सुस्ती होना, काम पर जाने के बाद भी एकाग्रता नहीं दिखना, याददाश्त की कमजोरी, चक्कर आदि लक्षण हैं. इसके बचाव के लिए अत्यधिक मोबाइल के उपयोग से बचने की जरूरत है. भोजन में विटामिन डी लेना, धूप का सेवन करना, अकेले घर में कम से कम समय बिताना, कम से कम 40 मिनट तक शारीरिक व्यायाम करने से अवसादग्रस्तता से बचा जा सकता है. सूर्य नमस्कार इसमें प्रभावशाली है. बच्चे और बुजुर्ग होने लगे हैं बीमार, अस्पताल व निजी क्लीनिक में बढ़ी भीड़ सर्द हवाओं से सभी लोग परेशान हैं. पछुवा हवा ने भी कनकनी बढ़ा दी है. इससे अस्पतालों में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सर्दी-खांसी, बीपी, हर्ट संबंधी बीमारी बढ़ गयी है. मॉर्निंग वाॅक करने वालों पर भी ठंड का असर देखा जा रहा है. वरीय चिकित्सक डॉ कपिल कुमार सिंह ने बताया कि ठंड में अमूमन मानव शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं जिस वजह से शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है. थोड़ा एक्सपोजर लगने से स्ट्रोक की आंशका बढ़ जाती है. इनमें प्रभावित व्यक्ति को ब्रेन हैमरेज, हार्टअटैक और पक्षाघात भी हो सकते हैं. इस मौसम में जो भी हृदयरोगी हैं या शुगर के मरीज हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय सिंह ने बताया कि बच्चों में भी ठंड की वजह से सर्दी-खांसी के अलावा निमोनिया की शिकायतें बढ़ रही हैं. बच्चों में कफ के अलावा उल्टी और दस्त की शिकायतें भी आ रहीं हैं. दूसरी ओर कफ और बुखार की शिकायत में साधारण एंटीबायोटिक्स का भी असर कम दिख रहा है. रखें सावधानी बीपी और शुगर के मरीज नियमित जांच और दवा लेते रहें हमेशा गर्म कपड़ों से शरीर को ढकें. भोजन और पानी गर्म ही सेवन करें. अलाव अथवा रूम हीटर अचानक बाहर न निकलें. बाहर निकलते समय सिर, कान और नाक को भी ढकें. सर्दी खांसी से प्रभावित व्यक्तियों से बच्चों को दूर रखें. सांस संबंधी परेशानी की स्थिति में चिकित्सक से सलाह जरूर लें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
NISHI RANJAN THAKUR

लेखक के बारे में

By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन