Bhagalpur news गंगा मुक्ति आंदोलन की 43वीं वर्षगांठ मनायी

गंगा मुक्ति आंदोलन की 43वीं वर्षगांठ पर गंगा मुक्ति आंदोलन व मत्स्यजीवी जल श्रमिक संघ के तत्वाधान में कहलगांव में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को शुभारंभ हुआ
गंगा मुक्ति आंदोलन की 43वीं वर्षगांठ पर गंगा मुक्ति आंदोलन व मत्स्यजीवी जल श्रमिक संघ के तत्वाधान में कहलगांव में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को शुभारंभ हुआ. अध्यक्षता डॉ योगेंद्र व संचालन उदय ने किया. नये व पुराने कार्यकर्ताओं ने अपने उदगार रखे. उपलब्धि बताते कहा कि गंगा मुक्ति आंदोलन ने तीन-चार बड़ी जीत अपने नाम दर्ज करायी, जो ऐतिहासिक है. यह आंदोलन मुगल काल से चल रही है. गंगा पर 80 किमी की जमींदारी समाप्त हुई. बिहार संयुक्त की सभी नदियां पारंपरिक मछुआरों के लिए कर मुक्त हुई. डॉ योगेंद्र ने कहा कि गंगा मुक्ति आंदोलन की तीन बड़ी उपलब्धि हासिल की. पहली मुगलकाल से चल रही 80 किमी की जमींदारी खत्म हुई. दूसरी बिहार की सभी नदियां पारंपरिक मछुआरों के लिए कर मुक्त हुई. तीसरी शंकरपुर दियारा में 513 बीघे बेनामी जमीन भूमिहीनों में बांटी गयी. सुनील सहनी ने कहा कि वर्तमान सरकार साजिश रच रही है. नीतीश सरकार मछुआ विरोधी है. वह नदियों पर से पारंपरिक मछुआरों का हकमारी कर कारपाेरेट के हवाले करने पर आमदा है. शीलम भारती झा ने कहा कि किसान और मछुआरा मिलकर गंगा को बचायेंगे. बक्सर में थर्मल पावर के विरोध में किसान लड़ रहे हैं. थर्मल पावर से मछुआरों पर खतरा आन पड़ा है. डॉ मनोज कहा कि गंगा मुक्ति आंदोलन शांतिमय आंदोलन की एक मिसाल है. डॉ फारूक अली ने बढ़ते तापमान की चर्चा की और कहा कि गंगा को मार कर एक संस्कृति को मारने का प्रयास किया जा रहा है. फरक्का से आये गंगा भांगन एक्शन कमेटी के तरीकुल इस्लाम ने कहा कि नदी प्राकृतिक स्रोत है. इसपर कोई टैक्स कैसे लगा सकता है. कार्यक्रम में फ्री फिशिंग के ड्राफ्ट को पढ़ कर पारित किया गया. शाम में गंगा में नौका जुलूस निकाला गया. महिलाओं और लड़कियों ने 400 दीपदान गंगा में किया. अंत में डॉ योगेंद्र सभी को गंगा को साक्षी मानकर नदी, प्रकृति और मनुष्य को बचाने का संकल्प कराया. धन्यवाद ज्ञापन मनोज सहनी और अर्जुन सहनी ने किया. मौके घनश्याम, कुमार चंद्र मार्डी, उमेश तुरी, जीवन जगन्नाथ, विप्लव भट्टाचार्य, सुषमा, तारा, पूजा, इंद्र नारायण थे.
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