टीएमबीयू: एमबीए विभाग में 30 लाख की पुस्तक खरीद पर फिर उठे सवाल, पूर्व छात्र ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

Author Arfin zubair|Edited by Amit Kr Sinha
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टीएमबीयू का प्रशासनिक भवन.

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के एमबीए विभाग में 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीद को लेकर विवाद फिर गरमा गया है. एक पूर्व छात्र ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर बिना टेंडर खरीद का आरोप लगाया है. हालांकि, विश्वविद्यालय की जांच समिति ने विभाग को क्लीन चिट दे दी है.

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Book Purchase Allegation : भागलपुर स्थित तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के एमबीए विभाग में पुस्तक खरीद को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है. विभाग के पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि करीब 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीद बिना टेंडर और वित्तीय नियमों का पालन किए की गई. हालांकि विश्वविद्यालय की जांच समिति पहले ही इस मामले में विभाग को क्लीन चिट दे चुकी है.

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30 लाख से अधिक की पुस्तक खरीद पर उठाए सवाल

एमबीए विभाग के पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव ने जिला और राज्य के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दावा किया है कि विभाग में 30 लाख रुपये से अधिक की पुस्तकों की खरीद वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए की गई. शिकायत में पुस्तक आपूर्तिकर्ता का नाम भी दर्ज किया गया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया में न तो टेंडर जारी किया गया और न ही आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया. उनका कहना है कि रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर के बिना ही पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई.

सिलेबस से जुड़ी किताबें नहीं होने का आरोप

पूर्व छात्र का आरोप है कि खरीदी गई अधिकांश पुस्तकें एमबीए पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं हैं और छात्रों के शैक्षणिक उपयोग में नहीं आ रही हैं. उनका कहना है कि पुस्तकों को लाइब्रेरी की अलमारी में बंद रखा गया है और विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए उपलब्ध भी नहीं कराया जाता.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुस्तक चयन के दौरान विभाग के शिक्षकों से कोई सुझाव नहीं लिया गया और छात्रों की आवश्यकता को नजरअंदाज किया गया.

800 से अधिक पुस्तकें खरीदने का दावा

संतोष कुमार श्रीवास्तव ने दावा किया कि उनके पास पुस्तक खरीद प्रक्रिया से संबंधित पूरी फाइल उपलब्ध है. उनके अनुसार फाइल में टेंडर प्रक्रिया का कोई उल्लेख नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक स्वीकृति 279 पुस्तकों की खरीद के लिए ली गई थी, जबकि बाद में लगभग 800 से अधिक पुस्तकें खरीदी गईं, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका पैदा होती है.

जांच समिति पहले दे चुकी है क्लीन चिट

दूसरी ओर विश्वविद्यालय की जांच समिति पहले ही इस मामले की जांच कर विभाग को क्लीन चिट दे चुकी है. समिति का कहना है कि पुस्तक खरीद निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है और सभी पुस्तकों की विधिवत एंट्री भी दर्ज है. जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 279 पुस्तकों की खरीद की स्वीकृति के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई गई और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं मिली.

एमबीए निदेशक ने आरोपों को बताया निराधार

एमबीए विभाग की निदेशक डॉ. निर्मला कुमारी ने कहा कि विश्वविद्यालय की जांच समिति पूरे मामले की जांच कर पहले ही क्लीन चिट दे चुकी है. उनके अनुसार विभाग में पुस्तक खरीद पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और मामले को बेवजह दोबारा उछाला जा रहा है.

उन्होंने कहा कि विभाग पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और जांच में सभी तथ्य स्पष्ट हो चुके हैं.

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