श्मशान घाट पर मांगा 1.5 लाख, नहीं देने पर कोरोना संक्रमित अधिकारी के शव के साथ लौटाया

Updated at : 14 Jul 2020 6:51 AM (IST)
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श्मशान घाट पर मांगा 1.5 लाख, नहीं देने पर कोरोना संक्रमित अधिकारी के शव के साथ लौटाया

भागलपुर: कोरोना की मार के बीच मरती जा रही संवेदना ने दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बना दी है. इसका ज्वलंत उदाहरण सोमवार को बरारी श्मशान घाट पर दिखा, जब कुछ लोगों के कारण घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाये गये शव को फिर से वापस लेकर लौटना पड़ा. फिर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद देर रात शव को जलाया गया.

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भागलपुर: कोरोना की मार के बीच मरती जा रही संवेदना ने दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बना दी है. इसका ज्वलंत उदाहरण सोमवार को बरारी श्मशान घाट पर दिखा, जब कुछ लोगों के कारण घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाये गये शव को फिर से वापस लेकर लौटना पड़ा. फिर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद देर रात शव को जलाया गया.

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अंतिम संस्कार कराने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग

जानकारी के अनुसार रविवार को एक वरीय अधिकारी का निधन हो गया था. वो कोरोना से पीड़ित थे. नियमानुसार उनका शव मायागंज अस्पताल के शवगृह में रखा गया था. उक्त अधिकारी भागलपुर में अकेले रहते थे. निधन के बाद उनके परिजन पटना से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भागलपुर आये. यहां उन सबके लिए उनके रिश्तेदार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो रामप्रवेश सिंह ने पीपीइ किट की व्यवस्था की. डीएसडब्ल्यू श्री सिंह के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए परिजन जब बरारी स्थित श्मशान घाट पर पहुंचे, तो वहां घाट पर तैनात लोगों का व्यवहार ठीक नहीं था. उन लोगों ने अंतिम संस्कार कराने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग की. कोरोना से परिजन की हुई असामयिक निधन से मर्माहत परिजनों ने उन लोगों से काफी मिन्नत की, पर उन लोगों ने एक न सुनी.

रोते रहे परिजन,फिर भी नहीं मानी बात

परिजनों के रोने का भी उन पर कोई असर नहीं हुआ. पूरे पैसे नहीं देने की स्थिति में उन लोगों ने शव वापस ले जाने को कहा. अंतत: पीड़ित परिजन शव लेकर लौट गये. शव को फिर से मायागंज अस्पताल के शवगृह में रखा गया. कई लोगों से बात करने के बाद यह तय किया गया कि आधी रात में पुलिस के साथ शव लेकर फिर वो श्मशान घाट जायेंगे और एकबार फिर अंतिम संस्कार की कोशिश की जायेगी. हालांकि यहां भी 20 से 30 हजार रुपये देने की बात होती रही. अपने के जाने के गम के साथ ऐसे व्यवहार से परिजनों के आंसू नहीं रुक रहे थे.

पुलिस की हस्तक्षेप के बाद देर रात शव को जलाया गया

इस मामले में टीएमबीयू के डीएसडब्ल्यू प्रो रामप्रवेश सिंह ने बताया कि सोमवार को सारी प्रक्रिया करने के बाद शव परिजनों को मिला था. परिजन अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस से श्मशान घाट पर शव लेकर पहुंचे. वहां पर अंतिम संस्कार करने वालों ने पहले मौत का कारण पूछा. परिजनों ने बताया कोरोना से मौत हुई है. इस पर अंतिम संस्कार करने वाले लोगों ने पहले कहा कि इस घाट पर संस्कार नहीं होगा. जब उनलोगों से अनुरोध किया, तो डेढ़ लाख रुपये की मांग की गयी. उनके परिचित ने उन्हें फोन पर इसकी जानकारी दी. फिर वहां से शव को लेकर सब मायागंज अस्पताल चले आये. पुलिस की हस्तक्षेप के बाद देर रात शव को जलाया गया.

एसएचओ ने कहा 

कोरोना पॉजिटिव के शव को जलाने गये परिजनों सहित शव को श्मशान घाट से सोमवार को लौटा दिया गया था. इसके बाद परिजनों ने मुझसे संपर्क किया. मदद के तौर पर कुछ व्यवस्था की गयी है.

एसआइ नवनीश कुमार, एसएचओ, बरारी सहायक थाना.

रात 12 बजे के बाद किया जाता है अंतिम संस्कार

बताया जा रहा है कि कोरोना से मरे लोगों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट पर रात 12 बजे के बाद किया जाता है. इसके लिए 10 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. दिन में अंतिम संस्कार के लिए मनमाना राशि की मांग की जाती है.

बरारी पुलिस के सहयोग से कराया गया अंतिम संस्कार

डीएसडब्ल्यू प्रो सिंह ने बताया कि पूरे मामले को लेकर बरारी पुलिस से संपर्क किया गया. पुलिस ने भरोसा दिलाया कि देर रात शव का अंतिम संस्कार करा दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि कोरोना पॉजिटिव के निधन के बाद अंतिम संस्कार में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

शवदाह गृह चालू होता, तो नहीं होती परेशानी

बता दें कि इससे पहले कोरोना से हुई मौत पर कई लोगों ने अपने परिजन के शव छोड़ दिये. कुछ के सामने तो ऐसा ही कारण बना, तो कुछ ने परिजन को छोड़ ही दिया. जानकारों का कहना है कि अगर भागलपुर का विद्युत शवदाह गृह चालू हो जाता, तो इस समस्या से मुक्ति मिलती. पर इस मामले में निगम की लापरवाही से सबकुछ होकर भी कुछ नहीं है.

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