निर्माणाधीन गंगा महासेतु का नाम ‘अंग महासेतु’ रखने की उठी मांग, मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

Bhagalpur News: सुलतानगंज-अगुवानी के बीच बन रहे गंगा महासेतु का नाम क्या होगा, इसे लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है. सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि इस पुल का नाम “अंग महासेतु” रखा जाए.
सुलतानगंज (भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट
Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सुलतानगंज और अगुवानी के बीच निर्माणाधीन गंगा महासेतु के नामकरण को लेकर नई मांग सामने आई है. सुलतानगंज विकास संघर्ष समिति और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बिहार सरकार से आग्रह किया है कि इस पुल का नाम “अंग महासेतु” रखा जाए. मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यह महासेतु केवल एक आधारभूत संरचना नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक भी है.
‘अंग महासेतु’ नाम रखने की क्यों उठी मांग
सुलतानगंज विकास संघर्ष समिति के संयोजक वीरेंद्र कुमार यादव और अखिल भारतीय नागरिक संगठन के सदस्य एवं सजग युवा अजगैबीनाथ धाम के उपाध्यक्ष दीपक कुमार (आर्यन) ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में शामिल अंग प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है.
ज्ञापन में कहा गया है कि अंगिका भाषा, दानवीर कर्ण की कर्मभूमि और इस क्षेत्र का गौरव आज भी करोड़ों लोगों की पहचान है. ऐसे में इस महासेतु का नाम “अंग महासेतु” रखा जाना पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान होगा.
अजगैबीनाथ धाम के धार्मिक महत्व का भी दिया हवाला
ज्ञापन में सुलतानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम के महत्व का भी उल्लेख किया गया है. बताया गया कि यहां उत्तरवाहिनी गंगा बहती है और हर वर्ष सावन में लाखों श्रद्धालु यहीं से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए कांवर यात्रा शुरू करते हैं.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह क्षेत्र राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान रखता है. इसलिए पुल का नाम भी इसी विरासत को दर्शाने वाला होना चाहिए.
17 जिलों की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ी मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अंगिका भाषा बिहार के लगभग 17 जिलों में बोली जाती है और करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान है. इसके बावजूद आज तक अंग क्षेत्र के नाम पर कोई बड़ी सार्वजनिक संरचना नहीं है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जब भी महासेतु के नामकरण का प्रस्ताव सरकार या बिहार विधानसभा के समक्ष आए, तब “अंग महासेतु” नाम को आधिकारिक स्वीकृति दी जाए.
श्रावणी मेला से पहले घाटों की सुरक्षा मजबूत करने की भी मांग
सामाजिक कार्यकर्ता सन्नी कुमार चौधरी ने भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय को भी ज्ञापन सौंपकर श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं.
उन्होंने कहा कि नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ मंदिर घाट और अन्य प्रमुख स्नान घाटों पर एसडीआरएफ और प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए. हाल के महीनों में हुई डूबने की घटनाओं को देखते हुए यह जरूरी है.
इसके अलावा मेला क्षेत्र के नालों की जल्द सफाई, खुले नालों पर ढक्कन लगाने और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है.
Bhagalpur News: श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
सन्नी चौधरी ने कहा कि श्रावणी मेला के दौरान देश-विदेश से लाखों कांवरिये सुलतानगंज पहुंचते हैं. ऐसे में स्वच्छता, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को समय रहते दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार निर्माणाधीन गंगा महासेतु के नामकरण को लेकर उठी इस मांग पर क्या फैसला लेती है और श्रावणी मेला से पहले सुरक्षा संबंधी सुझावों पर कितना अमल होता है.
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