अगस्त की शुरुआत होगी बारिश और ठंडी पूरबा हवा से, सावन में कांवरियों की यात्रा होगी और भी सुहानी

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आसमान में काले-काले बादल व भीगी सड़कों पर बाबाधाम जाते कांवरियों की सांकेतिक तस्वीर.

आसमान में काले-काले बादल व भीगी सड़कों पर बाबाधाम जाते कांवरियों की सांकेतिक तस्वीर.

Bhagalpur Weather Update : भागलपुर और आसपास के इलाकों में पिछले 27 घंटों से ठंडी हवा और काले बादलों ने लोगों को उमस से राहत दी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त की शुरुआत भी इसी तरह के सुहाने मौसम के साथ होगी. लगातार बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर होने वाली बारिश से तापमान सामान्य से नीचे रहेगा.

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Bhagalpur Weather Update : पिछले करीब 27 घंटे से भागलपुर और आसपास के इलाकों में चल रही ठंडी हवा और काले बादलों ने उमस से परेशान लोगों को राहत दी है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगस्त की शुरुआत भी इसी तरह के सुहाने मौसम के साथ होगी. लगातार बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर होने वाली बारिश से तापमान सामान्य से नीचे बना रहेगा. इससे सावन में पैदल यात्रा करने वाले कांवरियों को भी राहत मिलेगी और उन्हें वास्तविक सावन का एहसास होगा.

जानिए कैसा रहेगा मौसम का मिजाज

29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में आसमान घने बादलों से ढका रहेगा. इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. सुबह के समय हवा में नमी 70 से 80 प्रतिशत तथा दोपहर में 60 से 70 प्रतिशत तक रहने की संभावना है. वहीं 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरबा हवा चलने का अनुमान है, जिससे गर्मी और उमस का असर काफी कम रहेगा.

किसानों के लिए मौसम बना अवसर

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि संभावित बारिश का लाभ उठाते हुए धान की रोपाई समय पर पूरी करें. रोपाई से पहले खेतों में प्रति हेक्टेयर 25 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फॉस्फोरस, 30 किलोग्राम पोटाश तथा 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग करने से फसल की बेहतर वृद्धि होगी. मौसम की अनुकूल स्थिति को देखते हुए भागलपुर की प्रसिद्ध सुगंधित धान किस्म 'कतरनी' सहित अन्य सुगंधित धानों की बुआई भी इस समय उपयुक्त मानी जा रही है.

बारिश के पानी का करें बेहतर उपयोग

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि निचली जमीन के चारों ओर मजबूत मेड़ बनाकर वर्षा जल का संचयन करें. इससे जरूरत पड़ने पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा और फसल पर सूखे का खतरा कम होगा. मौसम की यह स्थिति खरीफ फसलों के लिए काफी लाभदायक मानी जा रही है.


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ललित किशोर मिश्र

लेखक के बारे में

By ललित किशोर मिश्र

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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