दिवेश हत्याकांड: अब जमानत पर अगली सुनवाई 12 जून को

Updated at : 03 Jun 2014 10:28 AM (IST)
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दिवेश हत्याकांड: अब जमानत पर अगली सुनवाई 12 जून को

भागलपुर: जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसपी शर्मा की अदालत में सोमवार को कांग्रेस नेता दिवेश सिंह हत्याकांड के अप्राथमिकी अभियुक्त मेयर दीपक भुवानियां व पार्षद संजय सिन्हा के अग्रिम जमानत आवेदन (1127/14 व 1128/14) पर सुनवाई हुई. सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कॉल फॉर डायरी व निचली(सीजेएम) अदालत से मामले का एलसीआर(मूल) […]

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भागलपुर: जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसपी शर्मा की अदालत में सोमवार को कांग्रेस नेता दिवेश सिंह हत्याकांड के अप्राथमिकी अभियुक्त मेयर दीपक भुवानियां व पार्षद संजय सिन्हा के अग्रिम जमानत आवेदन (1127/14 व 1128/14) पर सुनवाई हुई.

सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कॉल फॉर डायरी व निचली(सीजेएम) अदालत से मामले का एलसीआर(मूल) कागजात उपलब्ध कराने का आदेश दिया. अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 12 जून मुकर्रर की है. स्थगन आदेश पर अदालत ने कोई आदेश नहीं दिया. कोर्ट में सूचक के आपराधिक मामले के अधिवक्ता डॉ राजेश तिवारी ने कोर्ट के सामने कई दलीलें दी. कांड पर सुनवाई के लिए कई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित थे.

मेयर व पार्षद के वरीय अधिवक्ता कामेश्वर पांडे ने बहस के दौरान कोर्ट को बताया कि यह आठ साल पुराना मामला है. मेरे मुवक्किल मेयर का कोई कसूर नहीं है, ना ही कोई संदेह. उन्होंने बहस के दौरान कोर्ट को बताया कि पप्पू खां पर संदेह था, वह मारा गया. चूंकि मेरे मुवक्किल मेयर हैं, इसीलिए उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है. हाल के दिलों में जो लोकसभा चुनाव हुए उसमें किसी खास उम्मीदवार को मदद करने के लिए कहा गया. मेयर होने के नाते उन्होंने किसी की मदद नहीं की. कोर्ट में बताया कि इस केस में झूठा फंसाया गया है.

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कभी कहा जाता है कि यह मामला राजनीतिक है तो कभी जाता है कि यह हत्या भूखंड के लिए कर दी गयी. मेरे मुवक्किल व मृतक के बीच जमीन को लेकर कोई विवाद ही नहीं था. सूचक की ओर से अधिवक्ता डॉ राजेश कुमार तिवारी ने कोर्ट को बताया कि सूचक की ओर से कोर्ट में एक शपथ पत्र दाखिल किया गया है जिसमें कहा गया है कि इनका आपराधिक इतिहास रहा है, और जीपीएस 17/93 में मेयर फरार घोषित हैं. कोर्ट को अधिवक्ता डॉ तिवारी ने कहा कि जब ये फरार घोषित हैं, तो इन्हें अग्रिम जमानत कैसे मिल सकती है.

सूचक के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस महानिरीक्षक के कार्यालय ज्ञापांक संख्या 13 दिनांक 20 जनवरी 2014 में कहा गया है कि वरीय पुलिस अधीक्षक की देखरेख में दीपक भुवानियां व दो अन्य अभियुक्तों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को कहा गया था. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस ज्ञापांक में दूसरा कांड मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सहरसा के न्यायालय से संबंधित बताया जा रहा है. सूचक के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मेयर के विरुद्घ दो व्यक्ति ने कन्फेशनल स्टेटमेंट दिया था. कोर्ट में जमानत सुनवाई के समय अधिवक्ता विरेश प्रसाद मिश्र उपस्थित थे. इधर मेयर दीपक भुवानियां और पार्षद संजय सिन्हा की गिरफ्तारी के लिए सोमवार को कांड के अनुसंधानकर्ता ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आवेदन देकर प्रे किया है.

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