भागलपुर से पटना शिफ्ट हो जायेगा जल पर्षद का कार्यालय
Updated at : 08 Aug 2018 7:32 AM (IST)
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भागलपुर : भागलपुर के साहेबगंज में स्थित बिहार राज्य जल पर्षद के तीसरे डिवीजन का ऑफिस अब पटना शिफ्ट कर जायेगा. जल पर्षद के भागलपुर के कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार ने मुख्यालय को इस संदर्भ में पत्र भेज दिया है. इसकी वजह है कि यहां जल पर्षद के कार्यालय के जिम्मे जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट […]
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भागलपुर : भागलपुर के साहेबगंज में स्थित बिहार राज्य जल पर्षद के तीसरे डिवीजन का ऑफिस अब पटना शिफ्ट कर जायेगा. जल पर्षद के भागलपुर के कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार ने मुख्यालय को इस संदर्भ में पत्र भेज दिया है. इसकी वजह है कि यहां जल पर्षद के कार्यालय के जिम्मे जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट था, उसे सरकार ने बुडको को सौंप दिया है और जल पर्षद के पास भागलपुर में करने के लिए कोई काम नहीं रह गया है. जल पर्षद का भागलपुर कार्यालय पटना में शिफ्ट कर जाने के बाद 1987-88 से चल रहा यह दफ्तर सिर्फ चर्चा में रह जायेगा.
अधिकारियों के दफ्तर रहते हैं बंद
वैसे जल पर्षद का भागलपुर कार्यालय कभी-कभार ही खुला करता था. लेकिन भागलपुर के नालों के पानी को साफ करने का प्रोजेक्ट बुडको के हाथ में चले जाने के बाद जल पर्षद का कार्यालय अक्सर बंद ही रहा करता है. मंगलवार को इस कार्यालय के सारे कमरों में ताले लगे थे.
कार्यालय के स्थानांतरण का यह है कारण
नमामि गंगे योजना के तहत केंद्र सरकार ने 700 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी अक्तूबर 2017 में दी थी. इस योजना के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जाने और तीन नालियों के पानी की सफाई की योजना है. भागलपुर में 268.62 करोड़ रुपये की लागत से 65 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पीपीपी मॉडल पर बनाने का फैसला लिया गया था. इस काम को बुडको को सौंप दिया गया है. इस कारण जल पर्षद के हाथ में अब कोई काम नहीं रह गया है.
प्लांट में तैनात दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का नाम भेजा गया बुडको के पास
जल पर्षद में पहले से भागलपुर व मुंगेर को मिला कर 19 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनके नामों की सूची भागलपुर के एक्सक्यूटिव इंजीनियर ने बुडको को भेजी है, ताकि बुडको द्वारा नये प्लांट के निर्माण का काम शुरू किये जाने के बाद इन कर्मियों को उसमें काम मिल सके. भागलपुर में आठ कर्मचारी प्लांट के भीतर काम करते हैं.
इनमें छह कर्मचारियों की शिफ्टवाइज आठ-आठ घंटे पर (प्रत्येक आठ घंटे पर दो कर्मी) ड्यूटी बंटी हुई है. दो कर्मचारियों में एक कर्मचारी एक्सक्यूटिव इंजीनियर और एक कर्मचारी एसडीओ के कार्यालय में तैनात हैं. इन सबके अलावा छह कर्मचारी संप पर तैनात रखे गये हैं. कर्मचारियों ने बताया कि उनकी नियुक्ति 1987-88 में हुई और आज तक इन्हें दैनिक वेतनभोगी के रूप में ही रखा गया है. अब तो इनके बच्चे भी विवाहित हो गये हैं.
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