क्यूआर कोड के अनुदान से वंचित निजी स्कूलों के डेटा अपलोडिंग के लिए खुले ज्ञानदीप पोर्टल

Published by : SATISH KUMAR Updated At : 30 Jun 2025 6:46 PM

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जिलाभर में संचालित दर्जनों निजी स्कूल वर्ष 2014 से ही शिक्षा अधिकार अधिनियम के विहित प्रावधानों का पालन करते हुए बीपीएल परिवार के सैकड़ों बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मुहैया करा रहे हैं.

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बेतिया. जिलाभर में संचालित दर्जनों निजी स्कूल वर्ष 2014 से ही शिक्षा अधिकार अधिनियम के विहित प्रावधानों का पालन करते हुए बीपीएल परिवार के सैकड़ों बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मुहैया करा रहे हैं. जबकि सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2018 से संबंधित सहायता अनुदान की राशि मिलती रही है. लेकिन वर्ष 2022 से जब “ज्ञानदीप पोर्टल ” पर बच्चों की सूची अपलोड करने का आदेश आया, तब दर्जनों मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को क्यूआर कोड उपलब्ध नहीं कराया गया. इसमें क्यू आर कोड की अनिवार्यता के कारण उक्त पोर्टल पर बच्चों की एंट्री अब तक अपलोड नहीं हो सकी है. इसका कारण ऐसे दर्जनों स्कूलों को वर्ष 2023 और 2024 में स्कूलों को क्यूआर कोड मिला है. इसके कारण वर्ष 2019 से 2025 तक दर्जनों प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क पढ़ाई करते रहे सैकड़ों विद्यार्थियों का डेटा “ज्ञानदीप ” पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाया है. जिसके कारण जिले के दर्जनों प्राइवेट स्कूल तब क्यू आर कोड उपलब्ध नहीं रहने के कारण संबंधित अनुदान राशि प्राप्त करने से वंचित रह गए हैं. अब सरकारी अनुदान योजना के लाभ से अब तक वंचित संबंधित निजी स्कूलों को एक मौका देने की मांग प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला सचिव अबदुल्लाह उर्फ अरशद सरहदी ने निदेशक प्राथमिक शिक्षा और अन्य को पत्र लिख कर पुराने डेटा को ज्ञानदीप पोर्टल अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है. ताकि 2019 से 2025 तक आरटीई के तहत पढ़े बच्चों की सूची ज्ञानदीप पोर्टल पर अपलोड करके संबंधित सरकारी अनुदान की दावेदारी कर सकें.एसोसिएशन के जिला सचिव अबदुल्लाह उर्फ अरशद सरहदी ने निदेशक के अलावा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद समाएल अहमद और जिला शिक्षा पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह से भी मदद की गुहार लगाई है. जिला सचिव ने कहा कि जिन स्कूलों को 2024 के अंत में क्यूआर कोड मिला है, वे पहले से मान्यता प्राप्त हैं और 2014-15 से ही आरटीई के तहत बच्चों को पढ़ा रहे हैं.तकनीकी कारणों से वे 2022 में क्यूआर कोड से वंचित रह गए थे.अब उन्हें पोर्टल पर एंट्री का अवसर मिलना चाहिए. ————- वर्जन पोर्टल पर पुराने आंकड़ों को अपलोड करने की अनुमति विभाग स्तर से ही संभव है. इसको लेकर विभागीय स्तर निर्णय लिया जाना ही संभव है. मनीष कुमार सिंह, डीइओ, पश्चिम चंपारण

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