बगहा में ड्रोन निगरानी और कड़ी सुरक्षा के बीच निकला ताजिया जुलूस, शांतिपूर्ण संपन्न हुआ मुहर्रम
बगहा में मुहर्रम के अवसर पर निकाला गया ताजिया जुलूस
बगहा में मुहर्रम का ताजिया जुलूस कड़ी सुरक्षा और ड्रोन निगरानी के बीच शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया. अखाड़ों में खिलाड़ियों ने पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन किया, जबकि पूरे जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे.
बगहा से चंद्रप्रकाश आर्य की रिपोर्ट
Bagaha Muharram News: पश्चिम चंपारण के बगहा पुलिस जिला क्षेत्र में मुहर्रम का पर्व शनिवार को पूरी श्रद्धा, आस्था और आपसी भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और ड्रोन कैमरों की निगरानी के बीच शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ताजिया जुलूस निकाले गए. पूरे आयोजन के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली.
ड्रोन कैमरों से हुई निगरानी, चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस
मोहर्रम को लेकर पुलिस प्रशासन एक दिन पहले से ही अलर्ट मोड में था. संवेदनशील स्थानों, ईदगाहों, मस्जिदों, प्रमुख चौक-चौराहों और जुलूस मार्गों पर पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और महिला-पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी.
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि सभी थाना क्षेत्रों में संबंधित थानाध्यक्ष लगातार गश्त करते रहे. पूरे अनुमंडल में ड्रोन कैमरों के माध्यम से जुलूसों की निगरानी की गई ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
अखाड़ों में खिलाड़ियों ने दिखाए पारंपरिक करतब
बगहा नगर के पारस नगर, गांधीनगर, ईदगाह मस्जिद, डुमवलिया, बगहा-दो, पटखौली और रत्नमाला सहित कई स्थानों पर ताजिया जुलूस के साथ भव्य मेलों का आयोजन हुआ. इस दौरान अखाड़ों के खिलाड़ियों ने लाठी, डंडा और पारंपरिक युद्धकला के हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे जुटे रहे.
अधिकारियों ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा
एसडीएम चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण और एसडीपीओ रामनगर रागनी कुमारी लगातार ताजिया जुलूस और मेलों की निगरानी करते रहे. नगर थानाध्यक्ष शैलेश कुमार, पटखौली थानाध्यक्ष उत्कल कांत सहित सभी थाना क्षेत्रों के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहे.
एसपी राजेश कुमार ने कहा कि प्रशासन की सतर्कता, पुलिस की मुस्तैदी और आम लोगों के सहयोग से मोहर्रम का पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ.
मुहर्रम का धार्मिक महत्व क्या है?
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसी से नए इस्लामी वर्ष की शुरुआत होती है. इसकी 10वीं तारीख, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, करबला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाती है, जब हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत दी थी. उनका बलिदान सत्य, न्याय, मानवता और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है.
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लेखक के बारे में
By Sarfaraz Ahmad
सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।
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