25 अगस्त तक सांसद-विधायकों को ज्ञापन सौंपेंगे किसान, मांगें नहीं मानीं तो 26 नवंबर से फिर शुरू होगा आंदोलन

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बैठक में भाग लेते मोर्चा के प्रतिनिधि

Begusarai News : संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है. सरकार ने मांगें नहीं मानी तो होगा बड़ा आंदोलन.

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Begusarai News : संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की जिला इकाई की बैठक गुरुवार को सीपीआई (माले) जिला कार्यालय में हुई. बैठक में 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार की ओर से एसकेएम को दिए गए लिखित आश्वासन से कथित वादाखिलाफी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत बेगूसराय में सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. एसकेएम के आह्वान के तहत 25 अगस्त तक जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा.

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सांसदों और विधायकों को सौंपा जाएगा ज्ञापन

बैठक में निर्णय लिया गया कि ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों पर एसकेएम की सात प्रमुख मांगों सहित स्थानीय मुद्दों पर ठोस कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जाएगा. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए. मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचायी जाएगी.

एमएसपी गारंटी कानून और कर्जमाफी की मांग

किसानों की प्रमुख मांगों में सभी मुक्त व्यापार समझौतों को निरस्त करना, सी2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देना, किसानों की कर्जमाफी और किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देना शामिल है. इसके अलावा बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं लगाने की मांग की जाएगी.

किसानों ने फसलों और पशुधन के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के माध्यम से पूर्ण बीमा कवरेज, 10 हजार रुपये मासिक पेंशन, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने तथा पुरानी मनरेगा अधिनियम, 2005 को बहाल करने की मांग भी उठायी है.

विभाज्य कोष में राज्यों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने की मांग

बैठक में राज्यों के लिए विभाज्य कोष में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने की मांग उठाने का निर्णय लिया गया. किसान नेताओं का कहना है कि इससे कृषि के आधुनिकीकरण और कृषि उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य और न्यूनतम मजदूरी के लिए कानून बनाने तथा किसान और गरीब मजदूरों की आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी.

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बिहार में बाढ़-सुखाड़ और खाद-बीज की समस्या भी उठेगी

बिहार से जुड़ी स्थानीय मांगों में बाढ़-सुखाड़ से निपटने की समुचित व्यवस्था, राहत कार्यों में भ्रष्टाचार पर रोक, ग्रामीण गृह कर एवं राजकीय पथकर की वापसी, जमाबंदी सुधार में धांधली और भ्रष्टाचार पर रोक शामिल है. इसके अलावा वास-आवास, पुनर्वास एवं पर्चाधारियों की बेदखली रोकने, खाद-बीज की किल्लत और कालाबाजारी पर नियंत्रण तथा किसान आईडी कार्ड की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी की जाएगी.

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26 नवंबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि यदि सरकार किसानों की गंभीर मांगों की अनदेखी करती रही, तो 26 नवंबर 2026 से देशव्यापी निरंतर सामूहिक संघर्ष फिर शुरू किया जाएगा. किसान नेताओं ने कहा कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा. उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सीमाओं पर चला किसान आंदोलन केंद्र सरकार के लिखित आश्वासन के बाद 11 दिसंबर 2021 को स्थगित किया गया था.

बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में बिहार राज्य किसान सभा (जमाल रोड) के जिला सचिव दयानिधि चौधरी, बिहार राज्य किसान सभा (अजय भवन) के जिला सचिव दिनेश सिंह, किसान महासभा के जिला सचिव बैजू सिंह, मजदूर नेता चंद्रदेव वर्मा, युवा नेता रंजीत यादव सहित अन्य किसान नेता मौजूद रहे.

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Bipin Kumar Mishra

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