115 साल पुराने मंझौल परिषद मध्य विद्यालय भवन की मजबूती बनी आकर्षण का केंद्र, संरक्षण की उठी मांग

Author Vikash Kumar|Edited by Yuvraj Ratan
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115 साल से शिक्षा की अलख जगा रहा मंझौल का ऐतिहासिक स्कूल भवन,आधुनिक निर्माण पर भारी पड़ रही अंग्रेजी दौर की इंजीनियरिंग

Begusarai News : बेगूसराय के मंझौल स्थित परिषद मध्य विद्यालय का 100 वर्ष से अधिक पुराना भवन आज भी अपनी मजबूती और ऐतिहासिक पहचान के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र है. 115 वर्ष पुराने इस भवन की मोटी दीवारें और हवादार कमरे इसे आज भी इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बनाते हैं, जबकि नए भवन जर्जर हो चुके हैं. स्थानीय लोग इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं.

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Begusarai News : बेगूसराय जिले के मंझौल स्थित परिषद मध्य विद्यालय का 100 वर्ष से अधिक पुराना भवन आज भी अपनी मजबूत बनावट और ऐतिहासिक पहचान के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय की स्थापना वर्ष 1890-95 के आसपास हुई थी, जबकि वर्तमान भवन का निर्माण वर्ष 1910 से 1915 के बीच तत्कालीन लोकल बोर्ड द्वारा कराया गया था. करीब 115 वर्ष पुराने इस भवन में आज भी विद्यालय का संचालन हो रहा है और यह शिक्षा विभाग की सेवा में लगा हुआ है.

मोटी दीवारें और हवादार कमरे हैं भवन की खासियत

इस ऐतिहासिक भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूत संरचना है. मोटी ईंटों से बनी करीब 20 इंच चौड़ी दीवारें, ऊंची छतें और हवादार कमरे इसकी खास पहचान हैं. हालांकि समय के साथ कुछ दरवाजों के चौखट और छत के हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन भवन की मुख्य संरचना अब भी मजबूती के साथ खड़ी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने पुराने भवन की दीवारों में अब तक कोई बड़ी क्षति नहीं आई है.

नए भवन हुए जर्जर, पुरानी इमारत आज भी मजबूत

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन दशकों में इसी परिसर में पंचायत, शिक्षा विभाग, विधायक, सांसद और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत कई नए भवनों का निर्माण कराया गया. लेकिन इनमें से कई भवन कुछ वर्षों के बाद ही जर्जर स्थिति में पहुंच गए. वहीं, अंग्रेजी शासनकाल में निर्मित यह भवन आज भी अपनी मजबूती के कारण इंजीनियरिंग का उदाहरण बना हुआ है.

भवन तोड़ने की कोशिश का लोगों ने किया विरोध

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतीत में कई बार इस पुराने भवन को तोड़ने की कोशिश की गई. पिछले वर्ष भी भवन को ध्वस्त करने की पहल हुई थी, लेकिन ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका. अब क्षेत्र के बुद्धिजीवी और ग्रामीण इस भवन को ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं.

वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत कर बचाई जा सकती है विरासत

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत करा दी जाए तो यह आने वाली कई पीढ़ियों तक शिक्षा और इतिहास की विरासत के रूप में सुरक्षित रह सकता है. लोगों ने मंझौल के जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, विधायक, सांसद, जिला पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के लिए पहल करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बेगूसराय की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि जिले की विरासत सुरक्षित रह सके.

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