मंदार क्षेत्र में आज पारंपरिक तरीके से भगवान मधुसूदन की निकलेगी रथ यात्रा

Updated at : 26 Jun 2025 9:18 PM (IST)
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मंदार क्षेत्र में आज पारंपरिक तरीके से भगवान मधुसूदन की निकलेगी रथ यात्रा

मंदार क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से आज भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जायेगी. रथ यात्रा की आयोजन समिति ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है

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बौंसी. मंदार क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से आज भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जायेगी. रथ यात्रा की आयोजन समिति ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है. अंचलाधिकारी कुमार रवि के निर्देश पर भगवान मधुसूदन के रथ की रंगाई पुताई सहित अन्य कार्य पूर्ण कर हो गये हैं. आज सुबह में भगवान को पंचामृत स्नान कर कर पारंपरिक नए वस्त्र पहनायें जायेंगे. फिर उनकी आरती उतारी जायेगी. मधुसूदन मंदिर से जुड़े पंडित अवधेश ठाकुर ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे भगवान को गर्भ गृह से निकाल कर रथ के पास ले जाकर उनकी विशेष पूजा अर्चना की जायेगी. इसके बाद उन्हें रथ पर बिठाया जायेगा. रथ की विधिवत पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालु और पंडा समाज के लोगों द्वारा उनके रथ को खींचते हुए जैन मंदिर गेट तक लाया जायेगा. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु भगवान की पूजा अर्चना करेंगे. संध्या करीब पांच बजे भगवान मधुसूदन मंदिर पहुंचकर उनकी रथ यात्रा का समापन हो जायेगा.

16 पहिया वाले रथ पर निकलेगी रथयात्रा

16 कलाओं में निपुण भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा 16 पहिया वाले रथ पर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है. मालूम कि मधुसूदन नगरी में रथ यात्रा महोत्सव का एक अलग ही महत्व है. 19वीं सदी के तीसरे दशक से यहां पर रथ यात्रा निकाली जाती है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन क्षेत्र के किसान के साथ-साथ श्रद्धालु गण भगवान को विभिन्न तरह के आम के फल के साथ पके हुए कटहल भी चढ़ाते हैं. क्योंकि यह क्षेत्र कृषि प्रधान है. रथ यात्रा में भगवान से आशीर्वाद लेकर किसान इस क्षेत्र में खेती की शुरुआत भी करते हैं और भगवान से आशीर्वाद लेकर सुख शांति की कामना करते हैं.

एक दिवसीय मेला का होता है आयोजन

रथ यात्रा के मौके पर एक दिवसीय मेला का भी आयोजन होता है. मुख्य चौक से लेकर मंदिर जाने के रास्ते तक विभिन्न तरह के आम और पके हुए कटहल की बिक्री देखी जा सकती है. वहीं कई अन्य फल भी यहां पर बेचे जाते हैं. संस्कृति और सद्भाव का अनुपम दृश्य यहां पर देखने को मिलता है. मेला में अमीर, गरीब उच नीच सभी का भेदभाव समाप्त हो जाता है. श्रद्धालुओं के मुंह से केवल जय मंदार, जय मधुसूदन के बोल ही गूंजते हैं. दूसरी ओर मंदिर परिसर के ठीक सामने भी खेल तमाशा और झूले वालों ने अपना डेरा डाल दिया है. एक दिवसीय मेला में बच्चे, महिलाएं, युवतियां भी झूला झूलने के साथ-साथ विभिन्न तरह के पकवान खाने का आनंद लेती हैं.

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