नहाय-खाय के साथ तीन दिवसीय जिउतिया व्रत का आज से होगा आगाज.

Updated at : 12 Sep 2025 9:24 PM (IST)
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नहाय-खाय के साथ तीन दिवसीय जिउतिया व्रत का आज से होगा आगाज.

रविवार को सूर्योदय से पहले महिलाएं ओठगन करेंगी

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-संतानों की लंबी आयु के लिए माताएं रखेंगी निर्जल उपवास. -खरीदारी को लेकर बाजार में पूरे दिन लगी रही महिलाओं की भीड़. चंदन कुमार, बांका. जीवित्पुत्रिका व्रत का तीन दिवसीय कठिन अनुष्ठान आज से नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है. जिलेभर में पुत्र की दीर्घायु के लिए माताएं जीवित्पुत्रिका के पर्व पर 24 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी. मालूम हो कि जीवित्पुत्रिका या जिउतिया पर्व हिंदू धर्म में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाये जाने वाले पर्वों में से एक है. इस दिन व्रत का खास महत्व होता है. जिसे अपनी संतान की मंगल कामना और लंबी आयु के लिए रखा जाता है. इस संबंध में गुरुधाम के पंडित गोपाल शरण ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत अष्टमी तिथि में की जाती और इसका पारण नवमी तिथि में करना शास्त्र सम्मत माना जाता है. इस बार पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर रविवार को सुबह 8:51 बजे आरंभ होकर 15 सितंबर सोमवार को सुबह 5:36 बजे समाप्त होगी. रविवार को सूर्योदय से पहले महिलाएं ओठगन करेंगी और सोमवार को प्रात: 6:27 बजे के बाद व्रत का पारण होगा. दरअसल यह व्रत तीन दिनों तक चलता है और इसमें नहाय-खाय से लेकर निर्जल उपवास और पारण तक की परंपरा निभाई जाती है. -व्रत की पौराणिक कथा. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की शुरुआत कलियुग में हुई थी. कथा के अनुसार जीमूतवाहन नामक एक राजा ने एक स्त्री के पुत्र को बचाने के लिए स्वयं को गरुड़ देव के भोजन के रूप में प्रस्तुत कर दिया. उनकी यह निःस्वार्थ भावना देखकर गरुड़ प्रसन्न हो गये और उन्हें वैकुंठ जाने का आशीर्वाद दिया. साथ ही उन्होंने अन्य बच्चों को भी पुनर्जीवित कर दिया. तभी से यह परंपरा प्रारंभ हुई कि माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए जीमूतवाहन देवता की आराधना करते हुए यह उपवास रखती हैं. -बाजार में बढ़ी चहल-पहल, खूब बिका बांस का डलिया. जिउतिया पर्व को लेकर बाजार में शुक्रवार को काफी गहमागहमी रही. खास कर महिलाओं की भीड़ अधिक देखी गयी. जिउतिया में फलों का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है. इसको लेकर फलों का बाजार भी गर्म रहा. फलों में खास कर केला व खीरा की बिक्री सबसे अधिक हुई. इसके अलावे सेब, मौसमी, अमरूद जैसे फलों की भी बिक्री हुई. पर्व को लेकर बाजार में 50 रुपये दर्जन मिलने वाला केला 60 से 80 रुपये दर्जन मिल रहा था. 30 रुपये किलो मिलने वाला खीरा 50-60 रुपये किलो तक बिका. सत्पुतिया तो 40 रुपये किलो की जगह 120 रुपये किलो बिकने लगा है. सेब भी 100 रुपये से बढ़ कर 120-140 रुपये किलो तक पहुंच गया है. जबकि बांस का डलिया व नोनी साग का भी बाजार अधिक डिमांड रहा.

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SHUBHASH BAIDYA

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