सत्संग से ही होगा मानव जीवन का कल्याण : प्रमोद जी महाराज

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संतमत सत्संग का 34वां वार्षिक अधिवेशन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया.

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प्रवचन भक्ति भजनों से क्षेत्र हुआ भक्तिमय

बाराहाट. संतमत सत्संग का 34वां वार्षिक अधिवेशन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. दो दिवसीय इस अधिवेशन में महर्षि मेंही आश्रम कुप्पाघाट भागलपुर के स्वामी प्रमोद जी महाराज को सुनने के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संतमत श्रद्धालु एवं संत-महात्मा शामिल हुए थे. अधिवेशन के दौरान संतों एवं वक्ताओं ने अपने प्रवचनों में संतमत की मूल भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला. इस अवसर पर स्वामी प्रमोद जी महाराज ने कहा कि संतमत आत्मशुद्धि, सदाचार और मानव कल्याण का मार्ग है. सत्संग के माध्यम से व्यक्ति के भीतर नैतिकता, संयम और करुणा का विकास होता है, जिससे समाज में शांति और सद्भाव कायम रहता है. कार्यक्रम प्रतिदिन प्रातःकाल एवं संध्या समय ध्यान साधना, सत्संग तथा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया. भक्ति गीतों और कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. संतों ने नशामुक्ति, सामाजिक एकता, आपसी भाइचारा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया. इस अधिवेशन में महिला, पुरुष, युवा एवं बुजुर्ग श्रद्धालुओं की समान रूप से सहभागिता देखने को मिली. आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गयी थी.

समापन पर संतों का संदेश

जिला संतमत सत्संग का 34वां वार्षिक अधिवेशन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हो गया. समापन सत्र के दौरान उपस्थित संतों एवं महात्माओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्संग मानव जीवन को सही दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम है. स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि सत्संग के बिना जीवन दिशाहीन हो जाता है, जबकि गुरु और संतों की कृपा से आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है. स्वामी सत्य प्रकाश जी महाराज ने कहा कि आज के भौतिक युग में मनुष्य तनाव, अशांति और विकारों से घिरा हुआ है. ऐसे समय में संतमत आत्मचिंतन, संयम और सदाचार का मार्ग दिखाता है. स्वामी नरेशानंद जी महाराज ने कहा कि नाम-स्मरण, ध्यान साधना और सत्संग से मन निर्मल होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है. मौके पर स्वामी रविंद्र जी महाराज ने आपसी भाइचारे, प्रेम, सत्य और अहिंसा को जीवन में अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करना ही संतमत का मूल उद्देश्य है. समापन सत्र में विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गयी.

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