जयपुर के इनारावरण गांव की ढाई किमी सड़क बारिश में बनी दलदल, मरीजों को खाट पर ले जाने की मजबूरी
बांका के जयपुर में बारिश के मौसम में कच्ची सड़कें दलदल में बदल जाती हैं, जिससे ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो जाता है. तसर किसानों और को-ऑपरेटिव भवन के कर्मचारियों को भी कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है. मरीजों को खाट पर मुख्य सड़क तक ले जाने की पीड़ादायक स्थिति बनी हुई है.
सरकार गांव-गांव तक पक्की सड़क पहुंचाने और ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने का दावा कर रही है, लेकिन बांका के जयपुर क्षेत्र के सुदूर गांवों की तस्वीर इन दावों से अलग नजर आती है. कटियारी पंचायत के इनारावरण गांव से मल्होरीचक की पक्की सड़क तक करीब ढाई किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता बारिश के मौसम में दलदल में तब्दील हो जाता है. इसका खामियाजा इनारावरण, इंद्रालीला और आदिवासी बहुल लेटवा गांव के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. बरसात के चार महीनों में लोगों का आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है.
तसर किसानों के लिए भी परेशानी का सबब
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि भारत सरकार के केंद्रीय बोर्ड का सरकारी को-ऑपरेटिव भवन भी अब तक पक्की सड़क से नहीं जुड़ सका है. इस भवन में दो हजार से अधिक तसर किसानों का आना-जाना होता है. बारिश के दिनों में यहां कार्यरत अधिकारी और कर्मियों को भी करीब आधा किलोमीटर पहले ही अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ती है.
इसके बाद जूते-चप्पल हाथ में लेकर कीचड़ भरे रास्ते से पैदल भवन तक पहुंचना उनकी मजबूरी बन जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर बड़ी संख्या में किसान अपनी जरूरतों और कामकाज के लिए पहुंचते हैं, वहां तक पक्की सड़क नहीं होना विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है.
बच्चों से मरीजों तक, हर कोई परेशान
कच्चे रास्ते की बदहाली का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और रोजाना पैदल, साइकिल या बाइक से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है. बारिश के दौरान रास्ते पर जगह-जगह कीचड़ और जलजमाव हो जाता है. इससे फिसलने का खतरा बना रहता है और कई बार बाइक व साइकिल से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है.
ग्रामीणों के मुताबिक सबसे ज्यादा चिंता मरीजों को लेकर रहती है. रास्ता खराब होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. गंभीर स्थिति में मरीज को खाट पर लिटाकर कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. बारिश के मौसम में यह स्थिति ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक हो जाती है.
वर्षों से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
ग्रामीण संतोष सिंह, प्रमोद तांती, सिंगेश्वर मुर्मू, परमेश्वर मुर्मू, जितेंद्र हेंब्रम, विनोद तांती, आदित्य कुमार सहित अन्य ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है. वर्तमान और पूर्व विधायकों को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला.
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क महज आवागमन का रास्ता नहीं है, बल्कि तीन गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है. इसी रास्ते से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और किसानों का कामकाज प्रभावित होता है. इसके बावजूद वर्षों से सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है.
ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने अब आंदोलन का रुख अपनाने की चेतावनी दी है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो वे विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे.
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों की ओर से विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद गांव की मूलभूत समस्याएं फिर पीछे छूट जाती हैं.
विधायक बोले- जल्द दूर होगी समस्या
इधर कटोरिया विधायक पूरनलाल टुडू ने कहा कि क्षेत्र की सड़क समस्या का निदान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा. उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर प्रक्रिया अंतिम दौर में चल रही है. जल्द ही ग्रामीणों को इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
अब ग्रामीणों की नजर सड़क निर्माण की प्रक्रिया पर है. यदि जल्द काम शुरू होता है तो बरसात में दलदल बनने वाले इस रास्ते से तीन गांवों के लोगों के साथ हजारों तसर किसानों और को-ऑपरेटिव भवन से जुड़े लोगों को भी राहत मिल सकेगी.
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