मोबाइल छोड़ कराटे की किक-पंच सीख रहे बांका के बच्चे, इंडोर स्टेडियम में बढ़ा नन्हे खिलाड़ियों का उत्साह

Updated:
विज्ञापन

कराटे का प्रशिक्षण प्राप्त करते बच्चे. | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बांका के नन्हे-मुन्ने कराटे से आत्मरक्षा के साथ-साथ फिटनेस के गुर सीख रहे हैं. इंडोर स्टेडियम में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है, जो मोबाइल से दूरी और खेल से जुड़ाव का सकारात्मक संदेश दे रहा है.

विज्ञापन

बांका के इंडोर स्टेडियम में इन दिनों नन्हे-मुन्ने बच्चों के बीच कराटे को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है. छोटी उम्र के बच्चे पूरे जोश, लगन और अनुशासन के साथ कराटे की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कर रहे हैं. प्रशिक्षण के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है. नियमित अभ्यास के जरिए बच्चे अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ कराटे के कौशल को भी लगातार निखार रहे हैं.

विज्ञापन

कराटे से आत्मरक्षा के साथ फिटनेस पर जोर

इंडोर स्टेडियम में बच्चों को कराटे का प्रशिक्षण देने का उद्देश्य सिर्फ उन्हें आत्मरक्षा के गुर सिखाना नहीं है. इसके माध्यम से बच्चों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने, फिटनेस के प्रति जागरूक करने और उनमें आत्मविश्वास विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को कराटे की विभिन्न तकनीकों के साथ नियमित अभ्यास और अनुशासन के महत्व की जानकारी भी दी जा रही है.

प्रशिक्षण में शामिल बच्चे निर्देशों का पालन करते हुए अलग-अलग तकनीकों का अभ्यास करते नजर आते हैं. इससे उनमें एकाग्रता और धैर्य विकसित होने के साथ शारीरिक सक्रियता भी बढ़ रही है.

मोबाइल से दूरी और खेलों से जुड़ाव जरूरी

बच्चों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और बदलती जीवनशैली के बीच उन्हें खेल एवं शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी हो गया है. लंबे समय तक मोबाइल पर समय बिताने के बजाय खेलों में भागीदारी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मददगार हो सकती है.

कराटे जैसी गतिविधियां बच्चों को सक्रिय रखने के साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और एकाग्रता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. यही वजह है कि इंडोर स्टेडियम में कराटे सीखने के लिए बच्चों की भागीदारी सकारात्मक संदेश दे रही है.

प्रशिक्षक ने अभिभावकों से की अपील

कराटे प्रशिक्षक निलेश कुमार सिंह ने अभिभावकों और आम लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से किसी न किसी खेल या शारीरिक गतिविधि से जोड़ें. उन्होंने कहा कि खेलों से जुड़ने वाले बच्चे स्वस्थ और अनुशासित बनने के साथ आत्मविश्वास से भी भरते हैं. खेल बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने कहा कि बच्चों को यदि शुरुआत से ही सही वातावरण, नियमित अभ्यास और बेहतर मार्गदर्शन मिले तो वे खेल के क्षेत्र में भी अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं. इंडोर स्टेडियम में कराटे का प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की बढ़ती भागीदारी इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है.

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की मेहनत, उत्साह और अनुशासन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा का विषय बना हुआ है. बच्चों का यह उत्साह बताता है कि अवसर और उचित मार्गदर्शन मिलने पर उनमें खेल प्रतिभा को निखारने की भरपूर क्षमता मौजूद है.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन