गज पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, चरणायुध (मुर्गे) पर होगा प्रस्थान, जानिए घटस्थापना से हवन तक के शुभ मुहूर्त

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मां दुर्गा की सांकेतिक तस्वीर.

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शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसमें मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आगमन करेंगी. जानिए घटस्थापना, अष्टमी-नवमी पूजन और संधिपूजा के शुभ मुहूर्त. साथ ही जानें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान.

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बांका के नगर से लेकर ग्राम्य क्षेत्रों तक शारदीय नवरात्र एवं दुर्गापूजा की तैयारियां तीव्र हो गई हैं. जिलेभर में भव्य पूजा-पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है. देवी आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है. इस वर्ष मां दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से प्रारंभ होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, रविवार से नवरात्र का शुभारंभ होने के कारण मां दुर्गा का आगमन गज यानी हाथी पर होगा.

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बौंसी गुरुधाम के पंडित संतोष मिश्र के अनुसार, देवी का गज पर आगमन अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है. शास्त्रों में गज को बुद्धि, ज्ञान, ऐश्वर्य एवं समृद्धि का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि गज पर देवी का आगमन होने से पृथ्वी पर सुख-समृद्धि का संचार होता है. पंडित संतोष मिश्र बताते हैं कि मंगलवार को नवरात्र के समापन के कारण मां चरणायुध (मुर्गे) पर विदा होंगी. आगमन और प्रस्थान के संकेतों को समझने से ऐसा प्रतीत होता है कि माता अपने भक्तों को शक्ति, ज्ञान और वैभव से समृद्ध कर आने वाली विपत्तियों से लड़ने में सक्षम बनाना चाहती हैं.

निषिद्ध नक्षत्र-योग में होगी घटस्थापना

पंडित संतोष मिश्र ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को सूर्योदय के पश्चात ही कलश स्थापना का मुहूर्त प्रारंभ हो जाएगा. इस दिन चित्रा नक्षत्र रात 10:32 बजे तक तथा वैधृति योग रात 9:05 बजे तक रहेगा. चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को निषिद्ध माना गया है. हालांकि, शास्त्रीय विधान के अनुसार निषिद्ध नक्षत्र एवं योग की स्थिति में भी मध्याह्न से पूर्व घटस्थापना की जा सकती है.

घटस्थापना के लिए प्रातः 5:46 बजे से 9:39 बजे तक का समय शुभ रहेगा. इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त में प्रातः 11:13 बजे से 11:59 बजे तक कलश स्थापना करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

अष्टमी-नवमी के संधिकाल में होगी संधिपूजा

पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को मुख्य अष्टमी व्रत एवं पूजन किया जाएगा. अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को प्रातः 10:51 बजे तक रहेगी. इसके पश्चात महानवमी तिथि प्रारंभ होगी, जिसका समापन 20 अक्टूबर को दोपहर बाद होगा. 19 अक्टूबर को अष्टमी एवं नवमी तिथियों का संधिकाल रहेगा. इसी अवधि में संधिपूजा करना विशेष फलदायी माना गया है.

इसी दिन नवमी तिथि का हवन एवं कन्यापूजन करना भी श्रेयस्कर रहेगा. महानवमी हवन के लिए प्रातः 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का समय सर्वाधिक शुभ माना जा रहा है. इस अवधि में विधिपूर्वक हवन, कन्यापूजन एवं देवी आराधना करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है. नवरात्र में इस दिन होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्र में इस दिन होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

तिथिनवरात्र का दिनमां दुर्गा का स्वरूप
11 अक्टूबरप्रथममां शैलपुत्री
12 अक्टूबरद्वितीयमां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबरतृतीयमां चंद्रघंटा
14 अक्टूबरचतुर्थमां कुष्मांडा
15 अक्टूबरपंचममां स्कंदमाता
16 अक्टूबरषष्ठीमां कात्यायनी
17 अक्टूबरसप्तमीमां कालरात्रि
18 अक्टूबरअष्टमीमां महागौरी
19 अक्टूबरनवमीमां सिद्धिदात्री
20 अक्टूबरदशमीमां दुर्गा की विदाई

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