बांका में काश के सफेद फूलों ने दिया शरद ऋतु के आगमन का संकेत, प्रकृति सजी तो मां दुर्गा के स्वागत में तैयार लोग

Updated:
विज्ञापन

बांका में खिले काश के फूल.

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बांका में काश के सफेद फूलों का खूबसूरत नज़ारा चारों ओर बिखरा है. ये फूल शरद ऋतु और दुर्गापूजा के आगमन का संकेत दे रहे हैं. प्रकृति का यह नज़ारा लोगों को आकर्षित कर रहा है और गांवों में उत्सव की तैयारी तेज हो गई है.

विज्ञापन

बांका में इन दिनों जगह-जगह प्रकृति का बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है. खेतों की मेड़ों, नदी के तटीय इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और खाली जमीनों पर काश के सफेद फूल पूरी तरह खिल चुके हैं. मंद-मंद बहती हवा के साथ झूमते लंबे काश के फूल शरद ऋतु के आगमन का संकेत दे रहे हैं. नीले आसमान में तैरते सफेद बादलों और धरती पर फैली काश की सफेदी ने वातावरण को मनमोहक बना दिया है. प्रकृति का यह रूप लोगों को आने वाले शारदीय नवरात्र और दुर्गापूजा का एहसास भी करा रहा है.

विज्ञापन

काश की सफेदी में दिख रहा मां दुर्गा के आगमन का संदेश

इस वर्ष दुर्गापूजा की शुरुआत कलश स्थापना के साथ 11 अक्टूबर से होगी और विजयादशमी के साथ 21 अक्टूबर को इसका समापन होगा. इससे पहले ही प्रकृति ने मानो उत्सव के स्वागत की तैयारी शुरू कर दी है. ऊंचे पहाड़ी इलाकों से लेकर खेतों की मेड़ों और नदियों के किनारे तक खिले काश के फूल लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं.

लोकमान्यता और ग्रामीण सांस्कृतिक परंपराओं में काश के फूलों को शुद्धता, पवित्रता और उत्सव के आगमन का प्रतीक माना जाता है. शरद ऋतु की शुरुआत के साथ जब आसमान में सफेद बादल दिखाई देने लगते हैं और धरती पर काश के फूल लहराने लगते हैं, तो वातावरण में एक अलग ही उल्लास महसूस होने लगता है.

गांव-देहात में आज भी काश के फूलों को मौसम बदलने का प्रमुख प्राकृतिक संकेत माना जाता है. बुजुर्गों के बीच यह बात आम है कि खेतों में काश के फूल लहराने लगें तो समझ लेना चाहिए कि मां दुर्गा के आगमन और ढोल-ढाक की गूंज में अब ज्यादा समय नहीं बचा है.

दुर्गापूजा और बड़े त्योहारों के आने का शुभ संकेत

जिला मुख्यालय से सटे चांदन और ओढ़नी नदी समेत आसपास के क्षेत्रों में काश के फूलों की सफेदी देखते ही बन रही है. ग्रामीण संस्कृति में काश का यह धवल रूप उत्सव और उल्लास से गहराई से जुड़ा हुआ है. शहरों के शोर से दूर गांवों में लहराते काश के फूल लोगों को प्रकृति और अपनी मिट्टी से जोड़ रहे हैं.

सुबह और शाम के समय काश से सजे ग्रामीण इलाकों का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है. सफेद फूलों के बीच से गुजरती पगडंडियां और नदी किनारे का मनोरम दृश्य लोगों को कुछ देर ठहरकर प्रकृति को निहारने के लिए मजबूर कर रहा है.

काश के फूलों के बीच सेल्फी लेने पहुंच रहे युवा

प्रकृति के इस खूबसूरत रूप ने फोटोग्राफी के शौकीनों और युवाओं को भी आकर्षित किया है. शहर से युवा और परिवार इन दिनों नदी किनारे और काश से पटे खेतों तक पहुंच रहे हैं. लोग इन खूबसूरत जगहों पर तस्वीरें और सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं.

काश के फूलों से सजे मैदान मानो यह संदेश दे रहे हैं कि शरद ऋतु और आगामी पर्व-त्योहारों के स्वागत के लिए प्रकृति पूरी तरह तैयार है. बारिश के मौसम के बाद प्रकृति में आए इस बदलाव के साथ मौसम भी धीरे-धीरे करवट लेने लगा है.

गांवों में तेज हुई दुर्गापूजा की तैयारी

काश के फूलों के खिलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गापूजा को लेकर चहल-पहल भी बढ़ने लगी है. पूजा समितियां पंडाल, प्रतिमा और सजावट की तैयारियों में जुटने लगी हैं. ग्रामीणों के लिए काश के फूल महज प्रकृति की खूबसूरती नहीं, बल्कि त्योहार के करीब आने का संकेत भी हैं.

सफेद काश के बीच से गुजरती ग्रामीण पगडंडियां और नदी किनारे का मनमोहक नजारा इन दिनों बांका की खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है. प्रकृति के इस संदेश के साथ अब लोगों को मां दुर्गा के आगमन और शारदीय उत्सव का बेसब्री से इंतजार है.

ये भी पढ़ें : गज पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, चरणायुध (मुर्गे) पर होगा प्रस्थान, जानिए घटस्थापना से हवन तक के शुभ मुहूर्त

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन