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.बांका में 35 लाख की लागत से मत्स्य बीज हैचरी व फिश कियोस्क का निर्माण

Updated at : 03 Oct 2024 10:04 PM (IST)
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.बांका में 35 लाख की लागत से मत्स्य बीज हैचरी व फिश कियोस्क का निर्माण

फिश कियोस्क का निर्माण भी कराया जायेगा.

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-प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बांका के लिए एक-एक मत्स्य हैचरी व फिश किआॅक्स की हुई है स्वीकृति

बांकाः प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में एक-एक मत्स्य बीज हैचरी व फिश कियोस्क का निर्माण इस वित्तीय वर्ष में कराया जायेगा. राज्य स्तर से इसकी स्वीकृति दे दी गयी है. जानकारी के मुताबिक, एक मत्स्य बीज हैचरी के निर्माण में कुल 25 लाख रुपये की लागत आयेगी. जिले में इसके लिए सामान्य वर्ग के लाभुक का चयन होगा. चयनित लाभुक को मत्स्य बीज हैचरी इकाई निर्माण के लिए 40 प्रतिशत अनुदान की राशि भुगतान की जायेगी. यानी 25 लाख लागत के एवज में अनुदान के तौर पर लाभुक को 10 लाख रुपये सरकार देगी. शेष 15 लाख रुपये लाभुक को स्वयं खर्च करना होगा. जबकि, यहां एक फिश कियोस्क का निर्माण भी कराया जायेगा. इस योजना का लाभ भी सामान्य वर्ग के लाभुक को 40 प्रतिशत अनुदान पर दिया जायेगा. एक इकाई की लागत 10 लाख रुपये आयेगी. सरकार की ओर से चार लाख रुपये अनुदान के रुप में दिये जायेंगे. शेष छह लाख रुपये लाभुक स्वयं वहन करेंगे. योजना का लाभ लेने के लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन देना होगा. आवेदन के साथ जरुरी कागजात भी अपलोड करनी होगी.

बीज उत्पादन के साथ मछली को सुरक्षित व ताजा रखने का इंतजाम

इन दोनों योजना का मुख्य उद्देश्य जिले मछली बीज उत्पादन में निर्भर और मछली पालन को विकसित करना है. मत्स्य बीज हैचरी से बड़ी संख्या में मत्स्य बीड का उत्पादन होगा ताकि जिले के मत्स्य पालकों को लोकल स्तर से ही बीड की आपूर्ति सुनिश्चित कर ले. ज्ञात हो कि जिले में पूर्व से भी मत्स्य हैचरी स्थापित है, जिसका लाभ मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर फिश कियोस्क के जरिये मछली को ताजा व जिंदा अवस्था में रखने की सुविधा मिलेगी. इससे मछली को लंबे वक्त तक ताजा रखा जायेगा. इससे लोगों को ताजी मछली खाने के लिए मिल जायेगा. साथ ही मत्स्य पालकों की भी आमदनी काफी अच्छी हो जायेगी.

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना योजना के तहत जिले में एक मत्स्य बीज हैचरी व एक फिश कियोस्क का निर्माण कराया जाना है. चयनित लाभुकों को 40 प्रतिशत अनुदान के साथ इस योजना का लाभ दिया जायेगा. लाभ लेने के लिए विभागीय वेबसाइट पर आवेदन देना होगा.इन दोनों इकाई के निर्माण से जिले में मछली पालन के व्यवसाय को काफी प्रगति मिलेगी.

मनोज कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, बांका.B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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