री-एडमिशन और महंगी किताबों से अभिभावकों की बढ़ी आर्थिक परेशानी

Published by :SHUBHASH BAIDYA
Published at :15 Apr 2026 9:45 PM (IST)
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री-एडमिशन और महंगी किताबों से अभिभावकों की बढ़ी आर्थिक परेशानी

किताबों को खरीदने में व्यस्त हैं. दरअसल, जिले में प्रत्येक वर्ष निजी विद्यालयों ने एक संस्कृति चला रखी है

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– जिले के अमूमन सभी प्राइवेट विद्यालय में प्रति वर्ष री-एडमिशन और किताब के नाम पर वसूले जा रहे हैं मोटी रकम

बांका. इन दिनों प्राइवेट विद्यालय छुट्टी के दिन भी खोले जा रहे हैं. हैरान मत होईये विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए नहीं बल्कि ड्रेस, किताबें और री-एडमिशन के नाम पर दोहन के लिए विद्यालय खुल रहे हैं. विद्यालय के अतिरिक्त सभी पुस्तक भंडारों पर भी अभिभावक व बच्चों की भीड़ लगी हुई है. सभी बदले हुए किताबों को खरीदने में व्यस्त हैं. दरअसल, जिले में प्रत्येक वर्ष निजी विद्यालयों ने एक संस्कृति चला रखी है कि अभिभावकों से कोई न कोई कंडीशन लगाकर पैसा वसूलना है. यह बिना रोक-टोक चल रहा है. इस धंधे में लाखो-लाख की आमदनी महीने भर में हो जाती है. दरअसल, पिछले कई सप्ताह से जिले में निजी विद्यालयों द्वारा महंगी किताबें और री-एडमिशन (पुनः नामांकन) के नाम पर अभिभावकों से मनमानी राशि वसूले जाने का मामला सामने आ रहा है. अभिभावकों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर कहा कि जिला प्रशासन को इसपर कड़ा एक्शन लेने की आवश्यकता है. चूंकि, यदि वह अपना नाम खुलकर बताएंगे तो हो सकता है कि विद्यालय में उनके बच्चे अनावश्यक परेशानी झेले. जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 226 निजी विद्यालय संचालित हैं, जहां हर नए सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है. आरोप है कि कई स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिनकी कीमत बाजार दर से काफी अधिक होती है. इसके अलावा, हर वर्ष री-एडमिशन के नाम पर भी अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, जिसे अभिभावक अनावश्यक बता रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि फीस के अलावा किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म और अन्य मदों में भी अत्यधिक खर्च करना पड़ता है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानी बढ़ गयी है. री-एडमिशन, परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त वार्षिक शुल्क अलग से वसूला जाता है.

शिक्षा विभाग को हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि निजी विद्यालयों की फीस और अन्य शुल्कों पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू किए जाएं, ताकि अभिभावकों का शोषण रोका जा सके. साथ ही निजी विद्यालयों का समय-समय पर औचक निरीक्षण करने की आवश्कता है. जितनी राशि ली जाती है वैसा माहौल और सुविधाएं भी वहां नदारद है. साथ ही एक सरकार से एक स्पष्ट नियमावली बनाने की भी मांग की गयी है कि एक बार विद्यालय में नामांकन के पश्चात वर्ग बदलने पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूला जाय. साथ ही पुस्तक परिवर्तन की भी एक समय-सीमा निर्धारित की जाय.

प्रखंडवार प्रस्वीकृत निजी विद्यालयों की सूची

अमरपुर- 31

बांका-41

बाराहाट- 14

बौंसी-21

बेलहर- 13

चांदन- 19

धोरैया- 15

फुल्लीडुमर- 14

कटोरिया- 21

रजौन- 21

शंभुगंज- 16

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कहते हैं डीईओ

गुरुवार को निजी विद्यालय के साथ बैठक है. मामला संज्ञान में है, इस विषय को भी बैठक में प्रमुखता से रखते हुए स्पष्ट निर्देश दिया जायेगा. नियम के विरुद्ध कार्य करने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी.

देवनारायण पंडित, जिला शिक्षा पदाधिकारी, बांका. B

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