बौंसी में बिहुला-विषहरी पूजा की धूम, देर रात संपन्न हुआ अनोखा विवाह अनुष्ठान; जानें 5 दशक पुरानी परंपरा

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फोटो: कलश यात्रा मे शामिल मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

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बांका के बौंसी में 5 दशक से चली आ रही बिहुला-विषहरी पूजा का भव्य आयोजन हुआ. तीन दिवसीय अनुष्ठान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. जानिए इस अनोखी परंपरा और विषहरी-बिहुला के विवाह के बारे में.

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Banka Bishahari Puja: बौंसी (बांका). प्रखंड क्षेत्र के दलिया गांव स्थित प्राचीन विषहरी मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय बिहुला-विषहरी पूजा के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा. शाम में निकली कलश यात्रा में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जबकि देर रात पारंपरिक विधि-विधान के साथ बिहुला और विषहरी का विवाह संपन्न कराया गया.

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कलश यात्रा में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़

दूसरे दिन शाम करीब चार बजे मंदिर परिसर से कलश यात्रा निकाली गई. इसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए. भक्तिमय माहौल के बीच जयकारों के साथ यात्रा निकाली गई. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

देर रात संपन्न हुआ बिहुला-विषहरी विवाह

पूजा के दूसरे दिन का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान बिहुला और विषहरी के विवाह का रहा. देर रात पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ विवाह अनुष्ठान संपन्न कराया गया. आयोजन में मंदिर से जुड़े परिवारों और ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई.

पांच दशक से जारी है पूजा की परंपरा

वार्ड संख्या 17 और 18 में आयोजित इस पूजा की परंपरा काफी पुरानी बताई जाती है. वार्ड 18 निवासी और मंदिर के भगत दिनेश भगत ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन की शुरुआत अधिवासी पूजा से होती है. दूसरे दिन बिहुला-विषहरी विवाह का अनुष्ठान किया जाता है, जबकि अंतिम दिन माता की विदाई और विसर्जन होता है.

पूर्वज ने कराया था मंदिर का निर्माण

बताया गया कि गुप्ता परिवार करीब पांच दशक से लगातार इस पूजा का आयोजन करता आ रहा है. परिवार के सदस्यों के अनुसार उनके पूर्वज गुजरी दास ने मंदिर का निर्माण कराया था. धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा स्नान से लौटने के दौरान उनके साथ गंगाजल में सांप आया था. बाद में स्वप्न में उन्हें मंदिर निर्माण का संकेत मिला, जिसके बाद यहां पूजा की परंपरा शुरू हुई.

परिवार के सदस्य निभाते हैं धार्मिक जिम्मेदारी

पूजा के दौरान नागेश्वर दास बेटी का रूप धारण कर मुख्य धार्मिक अनुष्ठान निभाते हैं. परिवार के अन्य सदस्य भी पूजा की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में स्थानीय ग्रामीणों की भी बड़ी भागीदारी रहती है.

श्याम बाजार का मेला बना आकर्षण

Banka Bishahari Puja: पूजा के अवसर पर श्याम बाजार में भव्य मेला भी लगाया गया है. मेले में झूले और मनोरंजन के विभिन्न साधनों का बच्चे और बड़े आनंद लेते नजर आए. वहीं स्टेशन रोड स्थित विषहरी मंदिर में भी पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही.


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