बारिश के बाद सड़क और नाली का मिटा अंतर, 'टापू' बने वार्ड 11 में नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण

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सड़क पर बहता नाले का पानी

सड़क पर बहता नाले का पानी

बांका जिले में बारिश ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि सड़क और नाली का अंतर मिट गया है. भुरना पंचायत के वार्ड 11 में जलजमाव ने नरकीय हालात बना दिए हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

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बांका जिले के बाराहाट प्रखंड क्षेत्र की भुरना पंचायत (वार्ड नंबर 11) में इन दिनों एक ऐसा 'अजूबा' देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर प्रबुद्ध लोग भी सिर पकड़ने को मजबूर हैं. यहाँ के ग्रामीण बीते कई दिनों से एक बेहद जटिल पहेली को सुलझाने में लगे हैं कि सड़क नाली में है या नाली सड़क में! हालिया बारिश ने यहाँ के ड्रेनेज सिस्टम और विकास के दावों की ऐसी पोल खोली है कि सड़क और नाली का अंतर ही पूरी तरह मिट चुका है.

रास्तों पर फैला नाली का गंदा पानी, संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा

वार्ड नंबर 11 के निवासियों का कहना है कि पूरे रास्ते पर नाली का गंदा और दूषित पानी जमा रहने से न सिर्फ तीव्र बदबू आ रही है, बल्कि क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से मंडराने लगा है. मक्खियों और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण स्थानीय लोगों को मलेरिया, डायरिया और त्वचा संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों की चिंता सताने लगी है, लेकिन इस नरकीय स्थिति से मुक्ति दिलाने वाला कोई नहीं है.

करोड़ों की 'पक्की नाली-गली' योजना को लगा पलीता

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने गुस्से का इजहार किया:

नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को चुनाव के वक्त तो गाँव के रास्ते अच्छी तरह याद रहते हैं. लेकिन आज जब पूरा वार्ड पानी में डूबकर टापू बन चुका है और हम नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, तो कोई सुध लेने वाला नहीं है. यह बदहाली तब है जब सरकार हर घर नल-जल और सात निश्चय के तहत पक्की नाली-गली योजना पर कागजों में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. ऐसे में भुरना पंचायत के वार्ड 11 की यह बदरंग तस्वीर प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है.

प्रशासन की नींद टूटने का इंतजार

वार्ड टापू में तब्दील होने के बाद भी अब तक स्थानीय पंचायत स्तर या ब्लॉक स्तर से जलनिकासी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे पंप से पानी खींचना) नहीं की गई है. अब देखना यह है कि इस गंभीर जन समस्या और ग्रामीणों के आक्रोश के बाद नींद में सोया प्रशासन जागता है या भुरना पंचायत के लोग इसी तरह 'सड़क-नाली' के इस रहस्यमयी और खतरनाक खेल में उलझे रहने को मजबूर रहेंगे.


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अजय कुमार झा

लेखक के बारे में

By अजय कुमार झा

अजय कुमार झा प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बाराहाट (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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