मांगों को लेकर गरजी आशा कार्यकर्ता, वेतनमान और स्थायीकरण की उठी आवाज
Author Shubhash baidya
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बिहार राज्य आशा व आशा फैसिलिटेटर संघ, जिला शाखा बांका के आह्वान पर आशा और फैसिलिटेटर कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया
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बौंसी
. बिहार राज्य आशा व आशा फैसिलिटेटर संघ, जिला शाखा बांका के आह्वान पर आशा और फैसिलिटेटर कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यक्रम का आयोजन राज्य संघ के निर्देशानुसार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपनी एकजुटता दिखाई. संघ की जिलामंत्री कुसुम बाला सिन्हा ने कहा कि आशा और आशा फैसिलिटेटर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें आज भी सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखा गया है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि आशा व फैसिलिटेटर को श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए और प्रोत्साहन राशि के स्थान पर नियमित वेतनमान लागू किया जाए. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया. जिनमें मुख्य रूप से आशा व आशा फैसिलिटेटर को न्यूनतम 26,000 रुपये मासिक वेतन देने, लंबित प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित करने, सेवा निवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने, सरकारी कर्मियों की तरह पेंशन, ग्रेच्युटी, ईएसआई व अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं करने, राज्य सरकार द्वारा घोषित बढ़ी हुई पारिश्रमिक राशि का भुगतान सीधे खातों में करने सहित अन्य मांगें शामिल है. संघ पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच, परिवार नियोजन और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बावजूद इसके उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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लेखक के बारे में
By सुभाष वैद्य
सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
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